नाबार्ड और राजीविका के संयुक्त तत्वावधान में 'गोट टू ग्रोथ' परियोजना के तहत गुरुवार को पिंडवाड़ा ब्लॉक के झाखर, कुण्डाल और साबेला गांवों में आजीविका संवर्धन और क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम में वैज्ञानिक बकरी पालन को बढ़ावा देने, महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने, आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देने और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने पर जोर दिया गया। इस दौरान दो महिला लाभार्थियों के स्वरोजगार केंद्रों का उद्घाटन भी किया गया। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला परियोजना प्रबंधक अंकिता राजपुरोहित ने कहा कि राजीविका महिलाओं को संगठित कर उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ रही है। वहीं, नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक गौतम थोरी ने बताया कि 'गोट टू ग्रोथ' परियोजना के माध्यम से पशुपालकों को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और बेहतर प्रबंधन की जानकारी देकर बकरी पालन को लाभकारी आजीविका के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रशिक्षण से बढ़ेगी आय, मजबूत होगी आजीविका ब्लॉक परियोजना प्रबंधक मनोज कुमार मीना ने कहा कि राजीविका और नाबार्ड के संयुक्त प्रयासों से महिलाओं और पशुपालकों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन के जरिए ग्रामीण परिवार आर्थिक रूप से सशक्त बन रहे हैं और आय के स्थायी स्रोत विकसित हो रहे हैं। दो महिला उद्यमियों के स्टोर का उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान ग्राम झाखर में गणेश राजीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्य फैंसी देवी द्वारा स्थापित किराना एवं सब्जी की दुकान का उद्घाटन किया गया। वहीं ग्राम साबेला में लाभार्थी बबली बाई द्वारा स्थापित 'राज सखी किराना स्टोर' का भी शुभारंभ किया गया, जिससे ग्रामीण महिलाओं के स्वरोजगार को नई मजबूती मिली। वैज्ञानिक बकरी पालन का दिया प्रशिक्षण ग्राम कुण्डाल में 'गोट टू ग्रोथ' परियोजना के तहत रिफ्रेशर प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसमें वैज्ञानिक बकरी पालन, पशु स्वास्थ्य, संतुलित पोषण, टीकाकरण, रोग नियंत्रण और बेहतर प्रबंधन संबंधी तकनीकी जानकारी दी गई, ताकि पशुपालक कम लागत में अधिक लाभ अर्जित कर सकें। ग्रामीणों से योजनाओं का लाभ उठाने की अपील कार्यक्रम में जिला परियोजना समन्वयक नटवर सिंह राठौड़, एमआईएस मनोज खत्री, प्रयास सीएलएफ अध्यक्ष अजी बाई, क्लस्टर मैनेजर शीला बैरवा, कृषि सहायक सुरेश कुमार, समावेशी सखी हूरती बाई, राजीविका के कार्मिक, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, बकरी पालक तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों ने लाभार्थियों से सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने, वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने और स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनकर अन्य ग्रामीण परिवारों के लिए प्रेरणा बनने का आह्वान किया।