सीकर में राजू ठेहट हत्याकांड में शामिल सरजीत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है। हत्या के 10 दिन बाद ही पुलिस ने इसे गिरफ्तार कर लिया था। टेहट के मर्डर के दौरान ये शूटर से कॉल के जरिए कनेक्ट था। आज सुप्रीम कोर्ट की खंड पीठ के जज दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा ने सशर्त जमानत दी है। बता दें कि 3 दिसंबर 2022 को ठेहट को उसके घर के सामने ही गोलियों से भून दिया गया था। आनंदपाल गैंग ने लॉरेंस गैंग के साथ मिलकर हत्या को अंजाम दिया था। शूटर्स ने सेल्फी लेने के बहाने राजू ठेहट को घर से बाहर बुलाया था। इसके बाद 25 गोलियां दागकर भागे थे। शूटर्स को दिलवाया था मोबाइल सरजीत सिंह के वकील नमित सक्सेना ने बताया कि सरजीत सिंह पर आरोप है कि उसने रोहित गोदारा के इशारे पर ठेहट को मारने वाले पांचों शूटर्स को मोबाइल उपलब्ध करवाए थे। मर्डर के वक्त भी वह शूटर मनीष से कॉल के जरिए कनेक्ट था। खंडपीठ ने जमानत देते हुए इस मामले में कहा कि अभियोजन पक्ष ने मामले में 154 गवाह बनाए, जिसमें से केवल 16 गवाहों के बयान हो सके हैं। अभी 138 गवाहों के बयान होना बाकी है इसलिए ट्रायल में समय लग सकता है। पढ़िए- राजू ठेहट की हत्या की पूरी कहानी आनंदपाल और राजू ठेहट की दुश्मनी, शराब कारोबार बना कारण आनंदपाल और राजू ठेहट एक-दूसरे के जानी दुश्मन थे। दोनों की दुश्मनी की शुरुआत अवैध शराब के कारोबार से हुई थी। गैंगस्टर राजू ठेहट ने बलबीर बानूड़ा के साथ अवैध शराब का धंधा शुरू किया। दोनों शेखावाटी में अवैध शराब कारोबार की दुनिया में बड़ा नाम बन गए थे। बलबीर बानूड़ा ने अपने साले विजयपाल को भी अपने साथ काम में लगाया था। बिजनेस में हुए विवाद के चलते ठेहट ने विजयपाल को मौत के घाट उतार दिया था। बानूड़ा अब ठेहट के खून का प्यासा हो गया था। बानूड़ा ने ठेहट से बदला लेने के लिए नागौर के आनंदपाल को अपने साथ शामिल कर लिया था। बानूड़ा और आनंदपाल ने राजू ठेहट के करीबी गोपाल फोगावट की सीकर में एसके कॉलेज के सामने हत्या कर दी थी। आनंदपाल का करीबी बना सुभाष बराल ठेहट ने बानूड़ा और बानूड़ा ने ठेहट को मौत के घाट उतारने की कसम खा ली थी। फोगावट की हत्या के मामले में बलबीर बानूड़ा को उम्रकैद हो गई थी। तब आनंदपाल गैंग में सुभाष बराल नाम का बदमाश शामिल हुआ। सुभाष बराल धीरे-धीरे आनंदपाल का खास और काफी करीबी बन गया था। दोनों ठेहट गैंग के पीछे लग गए। आनंदपाल और ठेहट गैंग के बीच कई बार वर्चस्व की लड़ाई हुई थी। आखिरकार 2012 तक आनंदपाल, राजू ठेहट और बानूड़ा पुलिस की गिरफ्त में आ गए थे। आनंदपाल के मरने के बाद ठेहट के पीछे पड़ी लॉरेंस गैंग राजू ठेहट जेल में बंद था। आनंदपाल कोर्ट में पेशी के दौरान फरार हो गया था। साल 2017 में एक एनकाउंटर में आनंदपाल मारा गया था। आनंदपाल गैंग पूरी तरह से कमजोर पड़ गई थी। तब राजस्थान में लॉरेंस विश्नोई गैंग की एंट्री हुई थी। इसका जिम्मा रोहित गोदारा गैंग को मिला था। अब वर्चस्व की लड़ाई में ठेहट और लॉरेंस गैंग आमने-सामने थे। दोनों ने एक-दूसरे पर कई बार हमले भी किए थे। इस बीच गैंगस्टर रोहित गोदारा ने आनंदपाल के परिवार और उसके खास सुभाष बराल से मिलना शुरू कर दिया था। दोनों गैंग का एक ही मकसद था, राजू ठेहट को मौत के घाट उतार देना। ठेहट की हत्या का बनाया प्लान दुबई से आनंदपाल के परिवार ने बराल से कॉन्टैक्ट किया लॉरेंस और आनंदपाल गैंग के लोगों ने राजू ठेहट को मारने की प्लानिंग शुरू कर दी थी। 2022 में सुभाष बराल और राजू ठेहट जेल से जमानत पर बाहर आ गए थे। बराल के जमानत पर बाहर छूटते ही दुबई में बैठे आनंदपाल के घरवालों ने उससे कॉन्टैक्ट करना शुरू किया था। सुभाष बराल ने आनंदपाल के परिवार की एक लड़की के साथ ठेहट को मारने की पूरी प्लानिंग की। सुभाष बराल ने आनंदपाल गैंग के खास सदस्य शक्ति सिंह को, लॉरेंस ने सीकर के बदमाश दिनेश बारी व विक्रम बामरडा को तैयार किया था। ठेहट को मारने से पहले वैष्णो देवी गए शूटर्स ठेहट को मारने के लिए जेल में बंद कुछ बदमाशों की जरूरत थी। बदमाशों को जेल में मोबाइल पहुंचाया गया। ठेहट को मारने के लिए शूटर्स का तैयार करने का जिम्मा लॉरेंस गैंग के दिनेश बारी को सौंपा गया था। शूटर्स को मेंटली तैयार कर पूरा प्लान बनाया गया था। बराल और लॉरेंस गैंग के सदस्य शूटर्स को गोवा और वैष्णो देवी समेत देश के टॉप टूरिज्म प्लेस पर लेकर गए थे। इसके बाद हथियारों की प्रैक्टिस करवाई थी। 3 दिसंबर 22 को राजू ठेहट को उसके घर के बाहर ही प्री-प्लान तरीके से गोलियों से भून दिया गया था।