इलाज को लेकर बदलती सोच के बीच आयुष (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी आदि) राजस्थान में प्रभावी विकल्प बनकर उभरा है। राज्य के पहले आयुष सर्वे में 81.1% परिवारों ने आयुष उपचार को प्रभावी माना। अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराने वाले 89% और बिना भर्ती इलाज कराने वाले 91% मरीजों ने आयुर्वेद को चुना। वहीं खर्च के लिहाज से योग और होम्योपैथी सबसे किफायती रहे। आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय के सर्वे के अनुसार 15 वर्ष से अधिक आयु के 57.4% शहरी और 44.9% ग्रामीण लोग आयुष से परिचित हैं, लेकिन पिछले एक वर्ष में इसका उपयोग क्रमशः 13.4% और 12.3% लोगों ने ही किया। 12.5% परिवारों ने एलोपैथी के महंगे इलाज के कारण आयुष को विकल्प बनाया। एक वर्ष में राजस्थान में 6.7 करोड़ बार बिना भर्ती आयुष उपचार लिया गया। गैर-भर्ती उपचार पर प्रति परिवार औसत 1,086 रुपए और भर्ती उपचार पर 2,274 रुपए खर्च आया। हर 10वीं गर्भवती ने अपनाया आयुष भास्कर एक्सप्लेनर - प्रो. संजीव शर्मा, कुलपति, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (मानद विश्वविद्यालय) आयुर्वेद में गर्भावस्था के प्रत्येक चरण के लिए आहार, विहार और स्वास्थ्य संरक्षण का वर्णन है। चिकित्सकीय मार्गदर्शन में अपनाई गई आयुर्वेदिक जीवनशैली मां और गर्भस्थ शिशु के लिए लाभकारी हो सकती है। संस्थान के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में ‘गर्भ संस्कार’ कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं को आहार-विहार, योग, मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षित मातृत्व का मार्गदर्शन दिया जाता है। एलर्जी, सर्दी-जुकाम, त्वचा रोग, माइग्रेन, जोड़ों के दर्द और कई दीर्घकालिक बीमारियों में होम्योपैथी से अच्छे परिणाम मिले हैं। हालांकि गंभीर और आपातकालीन स्थितियों में यह आधुनिक चिकित्सा का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक उपचार है। -डॉ. पूजा अजमेरा, बीएचएमएस