सलूंबर में सोमवार रात नागरिक सुरक्षा विभाग के निर्देश पर आपदा प्रबंधन की तैयारियों का एक बड़ा अभ्यास किया। इस मॉक ड्रिल के तहत सायरन बजते ही पूरे जिले में 10 मिनट के लिए बिजली काट दी गई, जिससे ब्लैकआउट की स्थिति बन गई। बिजली कटौती की, गाड़ियां रुकी निर्धारित समय पर सायरन की गूंज के साथ ही शहर की बिजली आपूर्ति रोक दी गई। सड़कों पर दौड़ते वाहनों के पहिए थम गए और घरों की रोशनी बुझ गई। ये अभ्यास जिले में किसी भी संभावित आपदा या युद्ध जैसी स्थिति से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए किया गया था। कलेक्टर बोले- तैयारी ही बचाव इस सफल अभ्यास पर जिला कलेक्टर ने कहा, "तैयारी ही बचाव है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे अभ्यास का उद्देश्य जनता को डराना नहीं, बल्कि प्रशासन और आम जनता को किसी भी संभावित आपात स्थिति के लिए तैयार करना है। कलेक्टर ने सलूंबर की जनता द्वारा अनुशासन के साथ लाइटें बंद कर सहयोग देने की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये दर्शाता है कि जिला किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मानसिक और प्रशासनिक रूप से तैयार है। आग लगी, बचाव दल पहुंचा और रेस्क्यू किया मॉक ड्रिल के दौरान आरटीओ चौराहे पर आग लगने और जनहानि की कृत्रिम स्थिति निर्मित की गई। प्रशासन की तत्परता दिखाते हुए कुछ ही मिनटों में बचाव दल मौके पर पहुंच गया। आग में फंसे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। घायलों (डमी) को तत्काल एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया, जिसके लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम पहले से अलर्ट मोड पर थी और उन्होंने घायलों को तुरंत उपचार प्रदान किया। ब्लैकआउट के 10 मिनटों के दौरान वाहन चालकों ने अपनी गाड़ियां सड़क किनारे खड़ी कर हेडलाइट्स बंद कर दीं। शहर में जनरेटर और सोलर लाइटें भी बंद रहीं। हालांकि, मानवीय आधार पर अस्पताल, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन सेवाओं को इस ड्रिल से छूट दी गई थी ताकि वास्तविक मरीजों को असुविधा न हो। इस अभ्यास की निगरानी के लिए एडीएम डॉ. दिनेश राय सापेला, एएसपी रतन चावला, एसडीएम जगदीश चंद्र बामनिया, सीओ दिनेश चंद्र पाटीदार और डिप्टी हेरम्भ जोशी सहित जिला चिकित्सा अधिकारी एवं चिकित्सा विभाग की पूरी टीम तथा भारी पुलिस बल मौके पर तैनात रहा। अधिकारियों ने विभिन्न चौराहों पर जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और कंट्रोल रूम से हर गतिविधि पर नजर रखी। प्रशासन के अनुसार, यह ब्लैकआउट अभ्यास भविष्य की रणनीतियों का हिस्सा है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि संकट के समय संचार और राहत कार्य बिना किसी बाधा के कैसे संचालित किए जाएं।