प्रदेश में सैनेटरी नैपकिन सप्लाई में कंपनी पर मेहरबानी के लिए आरएमएससीएल ने नियमों को पूरी तरह धता बता दिया। कंपनी ने जिन सप्लायर के माध्यम से सैनेटरी नैपकिन देने की बात कही, उनमें से एक बंद हो चुकी है और दो ने खुद विभाग को लिखित में दिया था कि वे सैनेटरी नैपकिन सप्लाई नहीं करेंगे। इसके बावजूद कंपनी की ओर से कम होती सप्लाई पर कोई जवाब-तलब नहीं किया गया। हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस कंपनी (एचएलएल) को यह काम दिया गया, उसने शुरुआत में ही हर वर्ष 39 करोड़ 20 लाख सैनेटरी नैपकिन सप्लाई के लिए लिखित में दिया था, जबकि राजस्थान में हर तीन महीने में ही इतने सैनेटरी नैपकिन चाहिए थे। इसके बावजूद विभाग की ओर से यह पड़ताल नहीं की गई कि आखिर इतने सैनेटरी नैपकिन कैसे सप्लाई हो सकेंगे? विभागीय अधिकारियों ने उन कंपनियों की भी फिजिकल टेस्टिंग नहीं की, जिनका नाम सप्लाई करने वालों में शामिल था। भास्कर पड़ताल में सामने आया है कि जब कंपनी ने अधिकतम 40 करोड़ सैनेटरी नैपकिन ही पूरे साल में सप्लाई करने की बात लिखित में दी तो विभाग ने मामले को दबाने के लिए कंपनी से यह भी लिखित में ले लिया कि वह किसी भी तरह पूरा माल सप्लाई करेगी। लेकिन विभाग यह कभी जांच और पुष्टि नहीं कर सका कि कंपनी किस तरह यह सप्लाई करेगी। यहां तक कि आरएमएससीएल के अधिकारी पूरे मामले को जानकर भी चुप्पी साधे रहे। मामले में आरएमएससीएल एमडी पुखराज सैन ने कहा है कि एचएलएल कंपनी को नोटिस दिया गया है। तीन दिन में जवाब आने के बाद सभी तथ्यों की जांच की जाएगी। भास्कर की खबर के बाद कंपनी को नोटिस आरएमएससीएल ने एचएलएल से तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है। विभाग ने पूछा है कि घटिया क्वालिटी के सैनेटरी नैपकिन क्यों सप्लाई की गई? डिस्पोजेबल पाउच क्यों नहीं दिए गए? गौरतलब है कि दैनिक भास्कर ने प्रदेशभर में सैनेटरी नैपकिन की खराब सप्लाई और पूर्ति नहीं किए जाने के मामले को उजागर किया था।