नमस्कार सुजानगढ़ वाले SDM साहब अपनी हिंदी को लेकर मशहूर हो गए। मंत्री चाचा के तोते पर विधायक भतीजे का दिल आ गया और झुंझुनूं में सड़क का नायाब नमूना देखने को मिला। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. SDM साहब के लेटर की 'स्थिति' सुजानगढ़ के SDM साहब का गोले वाला लेटर तो आपने देख ही लिया होगा। बुरा हो ऐसे चेक करने वालों का जो सरकारी आदेश को भी इतना गौर से देखते हैं और मीन-मेष निकालते हैं। बात की गहराई में जाना चाहिए, वर्तनी में क्या रखा है? बात इतनी सी है कि बालाजी के मंदिर में कैमरानुमा ऐसी कोई चीज लेकर नहीं जा सकते जिससे अंदर संभावित मारपीट को रिकॉर्ड किया जा सके। हाल की घटना से प्रेरित होकर मंदिर पदाधिकारियों ने यह फैसला किया और सुजानगढ़ के SDM साहब ने आदेश जारी कर दिया। हो न हो, आदेश की कॉपी किसी छिद्रान्वेषी के हाथ लग गई। उसने लेटर को गौर से पढ़ा और जगह-जगह गोले लगा दिए। फिर आदेश की कॉपी को सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। कॉपी वायरल हो गई। कॉपी में गोले लगाने वाले से भी एक मिस्टेक हुई। उसने ‘स्थिति’ पर भी गोला लगा दिया। जबकि स्थिति बिल्कुल ठीक लिखा था। हो सकता है कि स्थिति पर गोला लगाने के पीछे उसका मकसद उस ‘स्थिति’ से था जो पूरे पत्र में झलक रही थी। खैर, सोशल मीडिया पर भद्द पिटी तो फौरन नया आदेश जारी कर दिया गया। जहां-जहां गोले लगे थे उन सब शब्दों को ठीक कर दिया गया। इस बीच ठीक करने वाले की नजर ‘स्थिति’ पर गई। स्थिति पर गोला लगे देख उसने सोचा कि गलत लिखा है। नए आदेश में उसने स्थिति को ‘स्थिती’ लिख दिया। हिंदी दिवस आने में 2 महीने बाकी हैं। हिंदी मातृभाषा है। लेकिन सरकारी कार्यालयों में इसकी ‘स्थिति’ क्या है, आप भी समझते होंगे। 2. मंत्रीजी का तोता 2013 में कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले की सुनवाई के दौरान तत्कालीन जस्टिस आर.एम. लोढ़ा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था- CBI पिंजरे में बंद ऐसा तोता है जो अपने मालिक की बोली बोलता है। यह वाक्य कहावत बन गया। CBI का तो पता नहीं लेकिन मंत्रीजी का तोता आजाद है। वह कंधों पर बैठकर जनसुनवाई देखने का अभ्यस्त हो चुका है। तोते को मालिक पर भरोसा हो जाए तो उसे पिंजरे की जरूरत नहीं। कुछ बातें तोता मंत्रीजी से सीखता है तो कुछ बातें मंत्रीजी तोते से सीखते हैं। मंत्रीजी को लेकर विरोधी तीखी बयानबाजी करते हैं। तोते को तीखी मिर्ची पसंद है। तोते की तरह मंत्रीजी भी तीखापन पचा जाते हैं। तोते को रटने की आदत होती है। कुछ बातें मंत्रीजी बार-बार दोहराते हैं। हो सकता है कि बोलने का इल्म सीखने के बाद तोते से अहम जानकारियां निकलें। हालांकि मंत्रीजी नहीं चाहते कि उनका प्यारा तोता उड़ जाए। लेकिन उन्होंने खाद-बीज का घपला करने वालों के तोते उड़ा रखे हैं। मंत्रीजी की महत्वकांक्षाएं ऊंची रहीं, गाहे-बगाहे वे व्यक्त भी करते रहे। लेकिन पार्टी-संगठन उनके लिए सबसे ऊपर है। तो कह सकते हैं कि महत्वकांक्षा के मर्ज को वे तोते की तरह पाल रहे हैं। बाकी उनका पालतू तोता है बड़ा भाग्यवान। मंत्रीजी से फुरसत मिलती है तो विधायक भतीजे का प्यार बरसने लगता है। 3. चलते-चलते.. पाकीजा में कैफी आजमी साहब ने बहुत खूबसूरत गीत लिखा। गीत था- चलते चलते यूं ही कोई मिल गया था। अगर आजमी साहब झुंझुनूं की सड़कों पर चलते तो उन्हें चलते-चलते खंभा जरूर मिल जाता। शहर के चूरू बाइपास पर सड़क के बीचों बीच खंभा है। सड़क के बीच खंभा देख आजमी साहब आनंद बख्शी की तरह लिखने लगते- चलते चलते यूं ही रुक जाता हूं मैं। सड़क के साइड में तो खंभा हर जगह होता है। बात तो तब है जब खंभा सड़क के बीचों बीच हो। चलने वाले का सिर जब तक खंभे से न टकराए, तब तक कैसे पता चलेगा कि गांव में बिजली भी है। वैसे खंभे को लेकर जनप्रतिनिधि व्यंजना में बात करते हैं। कहते हैं कि मेरा कार्यकाल तो 6 महीने पहले ही खत्म हो चुका। मैं तो निवर्तमान हूं। उनकी बात सुनकर लगता है कि अब तक स्कूल में काल गलत पढ़ाए गए। भूत-भविष्य तो ठीक है, लेकिन वर्तमान में निवर्तमान भी होता है। लोगों का कहना है कि बार-बार उन्होंने गुहार लगाई। लेकिन ठेकेदार नक्शे से टस से मस नहीं हुआ। यकीनन वह भी उस स्कूल से पास-आउट होगा जिसमें बोर्ड पर ध्येय वाक्य लिखा जाता था- राह में कोई बाधा आए, रुकना नहीं। किसी की कोई गलती नहीं। खंभा ही जिद्दी है जो इतनी मजम्मत के बाद भी बेशर्मी से खड़ा है। सड़क भी कुछ कम नहीं। बनते वक्त ही उसे कहना चाहिए था- जरा सा झूम लूं मैं, जरा सा घूम लूं मैं। खैर, गांव में सेल्फी पॉइंट की कमी थी, अब प्रदर्शन के बहाने लोग उस कमी को पूरा कर रहे हैं। इनपुट सहयोग- सुनील स्वामी (सुजानगढ़, चूरू), इम्तियाज भाटी (झुंझुनूं), राघवेंद्र गुर्जर (दौसा)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।