चूरू के रतनगढ़ स्थित एडीजे कोर्ट ने शेखावाटी के बहुचर्चित बिरजू ठेकेदार हत्याकांड में गुरुवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आठ आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया। साल 2012 में हुए इस चर्चित हत्याकांड में गैंगस्टर अनिल उर्फ पांडिया, कपिल और महेश उर्फ पपिया के खिलाफ अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा है। करीब 14 साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस निर्णय ने एक बार फिर इस मामले को चर्चा में ला दिया है। आठ आरोपियों को मिली राहत अदालत ने महिपाल बलारां, मनोहर उर्फ मनोज नेहरा, श्रवण निवाई सहित कुल आठ आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इस मामले में कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से दो आरोपियों की सुनवाई के दौरान ही मृत्यु हो चुकी है, जबकि तीन आरोपियों के खिलाफ फैसला अभी आना बाकी है। 2012 में हुई थी सनसनीखेज हत्या बिरजू ठेकेदार की 14 नवंबर 2012 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय वह दारिया मर्डर केस में सीबीआई का मोस्ट वांटेड आरोपी था और उस पर पांच लाख रुपए का इनाम घोषित था। फरारी के दौरान हुई उसकी हत्या ने पूरे शेखावाटी क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी और मामला लंबे समय तक सुर्खियों में रहा। तीन आरोपियों पर टिकीं निगाहें करीब 14 साल तक चली सुनवाई के बाद आए इस फैसले के बाद अब सभी की नजरें गैंगस्टर अनिल उर्फ पांडिया, कपिल और महेश उर्फ पपिया के खिलाफ सुरक्षित रखे गए निर्णय पर हैं। अदालत इन तीनों आरोपियों के संबंध में अपना फैसला बाद में सुनाएगी।