मामले में इसी सप्ताह ही निर्णय होने की संभावना एमबीएम विश्वविद्यालय में कुलगुरु प्रो. अजय शर्मा के कार्यकाल की शिकायत करने वाले पांच शिक्षकों पर हुई कार्रवाई अब पलट सकती है। राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने सोमवार को सभी पांच शिक्षकों की व्यक्तिगत सुनवाई की। सेवा समाप्ति, अनिवार्य सेवानिवृत्ति और पद से हटाने के आदेश एक-दो दिन में निरस्त किए जा सकते हैं। कुलगुरु प्रो. शर्मा के खिलाफ कथित वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं और महिला शिक्षिका के उत्पीड़न के आरोपों पर भी लोक भवन में मंथन जारी है। इस सप्ताह इस मामले में भी निर्णय आने की संभावना है। राज्यपाल बागड़े ने सोमवार को कुलगुरु प्रो. शर्मा का पक्ष भी सुना। करीब पांच मिनट चली सुनवाई में प्रो. शर्मा ने जांच समितियों की रिपोर्ट में कई बिंदुओं की अनदेखी किए जाने का मुद्दा उठाते हुए जांच निरस्त करने या रिव्यू कराने का अनुरोध किया। एक्शन, क्लीन चिट या नई कमेटी? लोक भवन में अब कुलगुरु प्रो. शर्मा को लेकर तीन विकल्पों पर मंथन चल रहा है- प्रत्यक्ष कार्रवाई, क्लीन चिट या फिर नई रिव्यू कमेटी का गठन। सूत्रों के अनुसार इसी सप्ताह अंतिम आदेश जारी हो सकते हैं। पांचों शिक्षकों ने बताई अपनी पीड़ा शिकायतकर्ता शिक्षकों ने राज्यपाल के समक्ष अपने-अपने मामलों की जानकारी दी। महिला शिक्षिका ने उत्पीड़न की शिकायतों के बाद सेवाएं समाप्त किए जाने की पीड़ा बताई। मैकेनिकल विभाग के प्रो. पीएम मीणा ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एसआर मीणा ने सेवा समाप्ति, जबकि माइनिंग विभागाध्यक्ष डॉ. रामप्रसाद चौधरी और स्ट्रक्चरल विभागाध्यक्ष प्रो. एसएस सांखला ने पद से हटाने के आदेशों को नियम विरुद्ध बताया। राज्यपाल बागड़े ने शिक्षकों को राहत मिलने का आश्वासन दिया है। इससे विश्वविद्यालय में पिछले कई महीनों से चल रहे विवाद में बड़ा मोड़ आने के संकेत मिल रहे हैं।