सिरोही जिले के सिंदरथ गांव में चल रही श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह के दूसरे दिन सोमवार को कथाव्यास पंडित जनार्दन ओझा ने राजा परीक्षित के जन्म और उनके महत्व का वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंडाल में मौजूद रहे। पंडित ओझा ने कहा कि कलियुग में भगवान को प्राप्त करने का सबसे अच्छा उपाय भक्ति है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान का नाम जपने, किसी का बुरा न करने और पाप से बचने का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि इस दुनिया में केवल कर्म फल ही साथ जाता है। उन्होंने समझाया कि परमात्मा धन, ऐश्वर्य या बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि शुद्ध अंतःकरण, निष्काम भक्ति और अनन्य प्रेम से प्राप्त होते हैं। राजा परीक्षित के जन्म से जुड़ी पौराणिक कथा सुनाई कथाव्यास ने राजा परीक्षित के जन्म से जुड़ी पौराणिक कथा भी विस्तार से बताई। उन्होंने कहा कि महाभारत युद्ध के बाद अश्वत्थामा ने पांडव वंश को समाप्त करने के उद्देश्य से उत्तरा के गर्भ में पल रहे बालक पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने गर्भ में ही बालक की रक्षा की थी। दूसरे दिन की कथा में सनातन धर्म के प्रखर प्रणेता महामंडलेश्वर हितेश्वरानन्द सरस्वती महाराज और हठ योगी रामगिरी महाराज का सान्निध्य भक्तों को प्राप्त हुआ। संतों के आगमन पर श्रद्धालुओं एवं यजमान परिवार ने उनका स्वागत किया। वृंदावन के विट्ठल म्यूजिकल ग्रुप ने बांधा समां कथा के दौरान सोमवार को विशेष रूप से श्री बांके बिहारी जी की अलौकिक झांकी सजाई गई। झांकी के दर्शन करते ही पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। इस अवसर पर वृंदावन से विशेष रूप से पधारे विट्ठल म्यूजिकल ग्रुप के कलाकारों ने एक से बढ़कर एक मधुर और भक्तिपूर्ण भजनों की प्रस्तुतियां दीं।