जयपुर के SMS हॉस्पिटल में स्टाफ (नर्सिंग और सुरक्षा गार्डो) को आग लगने पर बचाव के लिए उपकरण चलाने की ट्रेनिंग दी गई। स्टाफ को मंगलवार को छोटी आगजनी होने पर उसे प्राथमिक स्तर कैसे कंट्रोल किया जा सके, इसकी ट्रेनिंग दी गई। नगर निगम फायर ऑफिसर की ओर से SMS हॉस्पिटल में हॉस्पिटल स्टाफ (नर्सिंग और सुरक्षा गार्डो) को अग्निशमन उपकरण चलाने की ट्रेनिंग दी गई। इस दौरान हॉस्पिटल में जगह-जगह लगे आग बुझाने वाले सिलेंडरों की भी जांच की गई। इसके अलावा हॉस्पिटल में लगे दूसरे फायर फाइटिंग उपकरणों की भी टेस्टिंग की गई। फायर ऑफिसर ने बताया- अक्सर गर्मियों के मौसम में आगजनी का सबसे बड़ा कारण शॉर्ट सर्किट होता है। कूलर, एसी, पंखे दिन-रात चलने के कारण बिजली सप्लाई का लोड वायरिंग पर बढ़ने से शॉर्ट सर्किट होता है। इससे आग लगती है। ऐसे में प्राथमिक स्तर पर ही अगर आग पर काबू पाया जा सके तो बड़ी घटनाओं को रोका जा सकता है। वार्डों में मरीजों-परिजनों के लिए लगाए कूलर-एसी इधर, मरीजों और उनके परिजनों को गर्मी से राहत देने के लिए हॉस्पिटल के सभी वार्डों और कॉमन एरिया में कूलर, पंखे लगाए गए हैं। साथ ही आईसीयू वार्डों सहित कुछ वार्डों में एसी लगाए गए हैं। इसके अलावा हॉस्पिटल में अलग-अलग पॉइंट्स पर वाटर कूलर और आरओ सिस्टम लगाकर पीने के पानी की व्यवस्था की गई। 17 वार्ड हीटवेव प्रभावित मरीजों के लिए रिजर्व SMS हॉस्पिटल में साउथ विंग के बेसमेंट में 17 बैड हीटवेव से प्रभावित होने वाले मरीजों के इलाज के लिए रिजर्व किए गए हैं। इसमें 10 सामान्य बेड, जबकि 5 आईसीयू और 2 डीई-आईसीयू बेड शामिल हैं। वहीं इस व्यवस्थाओं पर रेगुलर मॉनिटरिंग के लिए मेडिसिन डिपार्टमेंट से 2 सीनियर डॉक्टर्स की टीम भी बनाई गई है। इसमें नोडल ऑफिसर श्रीकांत शर्मा को बनाया है, जबकि उनके सपोर्ट में डॉ. हंसराज पहाड़िया को लगाया गया है।