किडनी कांड का खुलासा करने वाले जयपुर के सवाई मानसिंह हॉस्पिटल के सीनियर न्यूरोसर्जन और पूर्व अस्पताल अधीक्षक डॉ. अचल शर्मा ने 3 साल पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। न्यूरोसर्जरी विभाग के मुखिया रह चुके डॉ. शर्मा के इस फैसले से चिकित्सा जगत में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। डॉ. शर्मा तीन साल बाद यानी वर्ष 2029 में रिटायर होने वाले थे। सरकार ने बुधवार को SMS हॉस्पिटल के सीनियर न्यूरोसर्जन डॉ. अचल शर्मा का स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) आवेदन मंजूर कर लिया। डॉ. शर्मा ने कुछ महीने पहले ही इस संबंध में सरकार को पत्र लिखा था और तब से लगातार उनके आवेदन पर निर्णय का इंतजार किया जा रहा था। आखिरकार सरकार स्तर पर प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके VRS को स्वीकृति दे दी गई। डॉक्टर शर्मा की जयपुर के जाने-माने न्यूरोसर्जन में होती है गिनती डॉक्टर शर्मा की गिनती जयपुर के जाने-माने न्यूरोसर्जन में से होती है। वे एसएमएस हॉस्पिटल के अधीक्षक पद पर भी रह चुके हैं और अधीक्षक रहते हुए उन्होंने ही सरकार और एसीबी के स्तर पर किडनी कांड की शिकायत की थी, जिसके बाद पूरा मामला सार्वजनिक हुआ था। हालांकि सरकार ने इस मामले के खुलने के बाद उनको अधीक्षक पद से हटा दिया था। डॉ. शर्मा एसएमएस मेडिकल कॉलेज में न्यूरोसर्जरी डिपार्टमेंट के एचओडी भी रह चुके हैं। आपको बता दें कि एसएमएस हॉस्पिटल में कई ऐसे सीनियर डॉक्टर हैं, जो पहले वीआरएस ले चुके हैं और कुछ अब भी कतार में हैं। इसमें नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट से सीनियर प्रोफेसर डॉ. विनय मल्होत्रा, पूर्व अधीक्षक डॉ. सुशील भाटी ने भी ने भी वीआरएस के लिए आवेदन कर रखा है। डॉ. मनीष अग्रवाल के लिए खुली राह डॉ. अचल शर्मा के मेडिकल कॉलेज से जाने के बाद अब सीनियर न्यूरोसर्जन की कमी रहेगी। ऐसे में इस कमी को पूरा करने के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन अब डॉ. मनीष अग्रवाल को दोबारा एसएमएस मेडिकल कॉलेज में लगाने की सिफारिश कर सकता है। डॉ. अग्रवाल को पिछले साल की रिश्वत कांड के मामले में निलंबित किया था। निलंबन के बाद उनका हेडक्वार्टर जोधपुर निर्धारित किया है।