प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और फर्जी चयन की परतें खुल रही हैं, लेकिन जांच एजेंसी खुद फाइलों के बोझ तले दबती जा रही है। पिछले दो साल में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के पास 5700 शिकायतें पहुंचीं, जिनमें से सिर्फ 400 में ही ठोस कार्रवाई हो सकी। यानी 5300 से ज्यादा मामले अब भी लंबित हैं। एसओजी में 33 जांच अधिकारी इन मामलों को देख रहे हैं। औसतन हर अधिकारी के पास 170 से 171 फाइलें हैं। मदद के लिए दो कांस्टेबल या हेड कांस्टेबल जरूर हैं, लेकिन जांच का अधिकार इंस्पेक्टर या उससे ऊपर के अधिकारी को ही है। नतीजा—फाइलें बढ़ती जा रही हैं और फैसले दूर होते जा रहे हैं। SIT बनी, पर ‘फौज’ नहीं बढ़ी 2012 में पेपर लीक मामलों की जांच के लिए विशेष जांच तंत्र (एसआईटी) बनाया गया था। मकसद था। भर्तियों में पारदर्शिता और सख्त कार्रवाई। शिकायतें बढ़ती गईं, लेकिन स्टाफ उसी अनुपात में नहीं बढ़ाया गया। अब हालात यह हैं कि लोक अभियोजक तक नियुक्त नहीं हैं। अदालतों में पैरवी भी अधिकारियों को खुद करनी पड़ती है। मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालय का गठन भी अब तक नहीं हुआ है। नियम बनाम हकीकत सरकारी दावा; पेपर लीक पर जीरो टॉलरेंस, नकल पर 3 साल की कैद, 10 लाख तक जुर्माना जमीनी सच्चाई - जांच पूरी कर चालान पेश किए बिना सजा संभव नहीं। 33 अधिकारियों के भरोसे 5700 शिकायतों का निपटारा, यह लक्ष्य जितना बड़ा है, संसाधन उतने छोटे। एसओजी में आने का रुझान क्यों घटा? कागजों में एसओजी में एडिशनल एसपी 20, डिप्टी एसपी 11, इंस्पेक्टर 22, सब इंस्पेक्टर 1, एसआईआई 3 और 120 हेड कांस्टेबल/कांस्टेबल हैं। लेकिन प्रभावी जांच अधिकारी सिर्फ 33 हैं। बीमारी, छुट्टियां और कोर्ट ड्यूटी के कारण ‘इफेक्टिव स्ट्रेंथ’ और भी कम हो जाती है। दूसरी ओर एटीएस में इंस्पेक्टर से कांस्टेबल तक को एसओजी से 25% ज्यादा इंसेंटिव मिलता है। 24 घंटे काम और कम प्रोत्साहन-ऐसे में एसओजी में आने का रुझान स्वाभाविक रूप से घट रहा है। जांच इतनी जटिल क्यों? रोज 50 शिकायतें "एसआईटी का गठन युवाओं में उम्मीद जगाने वाला कदम था। लेकिन पर्याप्त स्टाफ के बिना यह लड़ाई अधूरी है। जब एक अधिकारी पर 170 से ज्यादा केस हों, तो न्याय में देरी तय है। सरकार को तत्काल इंस्पेक्टर और वरिष्ठ अधिकारियों की संख्या बढ़ानी चाहिए, ताकि 5000 से ज्यादा लंबित शिकायतों को समय पर न्याय मिल सके।” -भास्कर एक्सपर्ट - अभिषेक पाराशर, हाईकोर्ट एडवोकेट