जिले में अब 10वीं के बाद विद्यार्थियों को स्ट्रीम चुनने की उलझन खत्म हो जाएगी। वर्तमान में विद्यार्थियों के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है कि वे साइंस, कॉमर्स, आर्ट्स या वोकेशनल में से कौन-सी स्ट्रीम चुनें। इसी उलझन को दूर करने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने अब सभी सरकारी स्कूलों में करियर गाइडेंस और काउंसलिंग कार्यक्रम अनिवार्य कर दिए हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को दबाव या अधूरी जानकारी के बजाय अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार सही निर्णय लेने में मदद करना है। ऐसे में जिलेभर के 1200 से ज्यादा स्कूलों में छात्रों को राहत मिल सकेगी। स्कूलों में अब व्यवस्थित रूप से विषय परिचय सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें विद्यार्थियों को विज्ञान, वाणिज्य, कला और वोकेशनल स्ट्रीम के विषय संयोजन, आगे के कोर्स, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार अवसरों की जानकारी देंगे। 5 किमी से ज्यादा दूरी पर स्कूल तो, ट्रांसपोर्ट वाउचर विभाग के अनुसार यदि किसी विद्यार्थी की पसंद का विषय उसके स्कूल में उपलब्ध नहीं है, तो शाला दर्पण के माध्यम से नजदीकी स्कूल की जानकारी दी जाएगी। 5 किलोमीटर से अधिक दूरी होने पर नियमानुसार ट्रांसपोर्ट वाउचर की सुविधा भी मिलेगी। स्कूलों में करियर गाइडेंस कॉर्नर भी बनाए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों को भविष्य की दिशा तय करने में बेहतर मार्गदर्शन मिल सकेगा। विभाग के अनुसार अक्सर स्ट्रीम चयन में परिवार का दबाव बच्चों पर हावी हो जाता है। इसे देखते हुए विभाग ने इस प्रक्रिया नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों की रुचि और क्षमता के आधार पर विशेष परामर्श सत्र भी होंगे। शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी विद्यार्थी पर किसी खास स्ट्रीम को थोपने का दबाव नहीं बनाया जाए और सभी स्ट्रीम को समान महत्व के साथ प्रस्तुत किया जाए। स्कूलों में अभिभावक-परामर्श बैठकें भी होंगी, ताकि वे बच्चों के निर्णय में सहयोग करें और किसी एक स्ट्रीम के लिए अनावश्यक दबाव न बनाएं। कक्षा 10 के बाद विषय और स्ट्रीम का चयन विद्यार्थियों के शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण निर्णय है। स्कूल स्तर पर करियर गाइडेंस और काउंसलिंग कार्यक्रम अनिवार्य किए हैं। - सीताराम गोयल, डीईओ बारां