हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 859 पदों की एसआई भर्ती 2021 में बड़े पैमाने पर पेपर लीक और धांधली होने पर मोहर लगाते हुए एकल पीठ के भर्ती रद्द करने के फैसले को सही ठहराया है। एकलपीठ के 28 अगस्त 2025 के आदेश को बरकरार रखते हुए खंडपीठ ने कहा कि आरपीएससी सदस्यों ने परीक्षा से 35 दिन पहले पेपर लीक किया और रिश्तेदारों व दलालों को दिया। पेपर सुनियोजित तरीके से जगदीश विश्नोई व कालेर गैंग के जरिए लीक किया गया। हालांकि, एकलपीठ के आदेशानुसार दोबारा भर्ती होने पर 2021 के 2.21 लाख अभ्यर्थियों को आयुसीमा में छूट मिलेगी। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा व जस्टिस संगीता शर्मा की विशेष खंडपीठ ने कहा कि आरपीएससी चेयरमैन की भूमिका संदिग्ध है। उन्होंने पेपरलीक के आरोपी सदस्य को इंटरव्यू में शामिल किया। पूरी परीक्षा मजाक बन गई। सदस्यों के आचरण के कारण आरपीएससी पर आमजन का भरोसा ही हिल गया। इसके लिए सदस्य संयुक्त रूप से और व्यक्तिगत ज़िम्मेदार हैं। सदस्यों के चयन के लिए गाइडलाइन तय करनी चाहिए। अभी सत्ता में बैठे लोग सदस्यों का चयन, बिना जांच-परख मनमर्ज़ी से करते हैं। पेपरलीक की घटनाएं अक्सर भीतर से ही शुरू होती हैं। कोर्ट ने सरकार को कहा कि आरपीएससी के उन सदस्यों को तत्काल हटाना चाहिए जिनके खिलाफ भर्ती में हुई धांधली के चलते टिप्पणियां की गई थीं। प्रार्थी पक्ष की ओर से सीनियर एडवोकेट आरपी सिंह, अधिवक्ता हरेन्द्र नील व असफल अभ्यर्थी की ओर से ओपी सोलंकी ने पक्ष रखा। सरकार की ओर से एजी राजेन्द्र प्रसाद और चयनित अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद ने बहस की। राज्य सरकार ने कहा कि भर्ती में दोषियों की छंटनी संभव है और सरकार की किसी के खिलाफ कोई दुर्भावना नहीं है। एकलपीठ का पूरी एसआई भर्ती को रद्द करना गलत है। अधिवक्ता ओपी सोलंकी का कहना है कि खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखा है, ऐसे में दुबारा भर्ती में उन अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट मिलेगी जिन्होंने इसमें भाग लिया है। इधर, कोर्ट ने आरपीएससी की कार्यशैली पर पीआईएल दर्ज करने वाले आदेश के हिस्से को हटा दिया। एसआई भर्ती - 2021 पेपर लीक मामला- एक नजर में हाईकोर्ट ने कई बार राज्य सरकार से पूछा कि एसआई भर्ती को रद्द करने पर उसकी क्या मंशा है। राज्य सरकार ने एक जुलाई 2025 को हाईकोर्ट में अतिरिक्त शपथ पत्र दायर कर कहा कि वह भर्ती रद्द नहीं कर रही। यह निर्णय राज्य सरकार ने मंत्रिमंडलीय उप समिति की अनुशंसा, एसआईटी के चेयरमैन की 26 जून की संशोधित रिपोर्ट और 27 जून की सांख्यिकी विभाग की रिपोर्ट पर लिया था। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने पक्षकारों की बहस 14 अगस्त को पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा। एकलपीठ ने अपना फैसला 28 अगस्त को सुनाया। एकलपीठ के फैसले को चयनित अभ्यर्थियों व राज्य सरकार ने खंडपीठ में चुनौती दी। जिस पर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 8 सितंबर को एकलपीठ के भर्ती रद्द करने वाले आदेश पर रोक लगाई। लेकिन चयनित अभ्यर्थियों को फील्ड ट्रेनिंग कराने की छूट दी थी। खंडपीठ के इस अंतरिम आदेश को मूल याचिकाकर्ता कैलाश चन्द्र शर्मा सहित अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर 2025 के आदेश से चयनित अभ्यर्थियों की ट्रेनिंग पर रोक लगाई, हाईकोर्ट को तीन महीने में अपीलों का निपटारा करने के लिए कहा था। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार, प्रार्थी पक्ष व चयनित अभ्यर्थियों की बहस 19 जनवरी को पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा। भास्कर इनसाइट- भर्ती रद्द करने के 5 बड़े कारण उम्मीद...4 राज्यों में भर्तियां हाई कोर्ट ने रद्द कीं, सुप्रीम कोर्ट से बहाल यूपी एसआई भर्ती - 2016-17 में आयोजित की गई भर्ती में करीब 6.3 लाख अभ्यर्थी शामिल थे। नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले पर सवाल उठाए थे। हाई कोर्ट में भर्ती फंसी रही। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती को क्लीन चिट दे दी थी। बिहार शिक्षक भर्ती - 6 दिसंबर 2023 को पटना हाई कोर्ट ने बिहार में 22,000 से अधिक प्राथमिक शिक्षकों (5वीं तक) की नियुक्ति रद्द कर दी थी। लेकिन बाद में अलग-अलग फैसले में इन्हें बहाल किया गया। हरियाणा जेबीटी भर्ती - 21 जुलाई 2022 को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 2017 में नियुक्त 1259 जेबीटी शिक्षकों की नियुक्ति को अवैध करार दिया था। 13 सितंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती को सही ठहराया था। मप्र व्यापम... 2009–2013 में मेडिकल और सरकारी भर्तियों में फर्जीवाड़ा का खुलासा। स्पेशल टास्क फोर्स ने जांच की। 2014 में हाई कोर्ट ने भर्ती रद्द की। बाद में 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती बहाल कर दी। सरकार ने कोर्ट में कहा...भर्ती रद्द करना गलत, सवाल : फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी? पेपर लीक के जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी 28 अगस्त को एकल पीठ ने तत्कालीन अध्यक्ष संजय क्षोत्रिय और सदस्यों को पेपर लीक के लिए जिम्मेदार ठहराया था। अब बड़ा सवाल है कि अभ्यर्थियों के सपनों को कुचलने वालों पर कार्रवाई कब होगी? इधर, खंडपीठ ने आरपीएससी की कार्यशैली पर दर्ज हिस्सा हटा दिया है। भास्कर एक्सपर्ट - के आर बगड़िया, पूर्व सदस्य, आरपीएससी 2025 व 2021 की भर्ती मर्ज करके एक और चरण बढ़ा दें अब 2021 की भर्ती में शामिल रहे अभ्यर्थियों और राज्य सरकार के लिए क्या रास्ता बचा है? हाई कोर्ट के फैसले के बाद अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सकते हैं। सरकार चाहे तो साल 2021 और 2025 की भर्ती को मर्ज करके पद बढ़ा सकती है। यानी 2021 के 859 पदों को मौजूदा भर्ती में ही शामिल कर देना चाहिए। इससे नई भर्ती की प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी। अभ्यर्थना, स्वीकृति और तैयारी में लगने वाला करीब एक साल बच जाएगा। एसआई भर्ती 2025 की परीक्षा आज से शुरू हो रही है? ऐसे में यह व्यवस्था कैसे संभव होगी? यह भर्ती परीक्षा दो चरणों में होगी। तीसरा चरण जोड़कर 2021 की भर्ती वाले अभ्यर्थियों को शामिल करना चाहिए। सिर्फ पेपर ही बनाना होगा। नए सिरे से भर्ती करें तो क्या होगा? एसआई भर्ती का ट्रैक देखें, 2016 के बाद 2021 में भर्ती आई थी फिर 2025 में यानी 5 साल में भर्ती हो रही। ऐसे में नई भर्ती को लाने में फिर 3-4 साल लग सकते हैं। एसओजी की रिपोर्ट कार्रवाई का आधार बनी एसओजी ने अब तक 140 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 63 ट्रेनी एसआई और 6 चयनित सब इंस्पेक्टर भी हैं। इनमें परीक्षा के कुछ टॉपर भी शामिल थे, जिन्होंने डमी कैंडिडेट बैठाकर या पहले से पेपर हासिल करके परीक्षा पास की थी। ​शामिल गैंग्स - जांच में कई बड़े और संगठित गैंग्स का पर्दाफाश हुआ। इनमें सबसे बड़ा नेटवर्क RPSC के पूर्व सदस्यों (जैसे बाबूलाल कटारा और रामूराम राईका) का इनसाइडर नेटवर्क था। इसके अलावा जगदीश गैंग, पेपर माफिया और डमी कैंडिडेट सप्लाई करने वाले कई सॉल्वर गैंग्स इस सिंडिकेट का हिस्सा थे। पेपर लीक करने वाले सरगनाओं, दलालों, परीक्षा केंद्र संचालकों और उनके मददगारों (जिनमें कई सरकारी शिक्षक और कर्मचारी भी शामिल हैं) सहित 70 से ज्यादा बदमाश और बिचौलिए पकड़े गए हैं। जांच की अवधि- हालांकि, परीक्षा 2021 में हुई थी, लेकिन SOG की सक्रिय और आक्रामक जांच पिछले 2 वर्षों (2024 से लेकर 2026 तक) से लगातार चल रही है। लाखों युवाओं को न्याय मिला “एसआई भर्ती में धांधली और पेपर लीक के कारण लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया था, ऐसे में कोर्ट का यह निर्णय मेहनतकश युवाओं के पक्ष में आया है। एकलपीठ के फैसले के बाद भी राज्य सरकार ने भर्ती को जारी रखने का प्रयास किया, लेकिन अब डिविजन बेंच के निर्णय से अभ्यर्थियों को न्याय मिला है।” -हनुमान बेनीवाल, नागौर सांसद व रालोपा प्रमुख पूर्व सरकार ने मामला दबाया था “एसआई भर्ती 2021 परीक्षा में धांधली के सबूत एसओजी व अन्य एजेंसियों को दिए थे, लेकिन युवाओं की मेहनत का सौदा करने वाली पूर्ववर्ती गहलोत सरकार ने मामले को दबा दिया था। हमारी सरकार ने पेपर लीक माफिया पर शिकंजा कसा और फर्जीवाड़ा करने वालों को गिरफ्तार किया। मेहनती बेरोजगार युवाओं के सपनों को कुचलने वालों के ख़िलाफ़ हमेशा मिलूंगा।” -किरोड़ी मीणा, मंत्री, राजस्थान सरकार