यह कहानी ऐसे बुजुर्ग किसान की है, जिसने सरकार की बंजर पड़ी चरागाह पर 5 साल में हरा-भरा जंगल उगा दिया। अपने खेत की तरह ही चरागाह की भी उन्होंने दिन-रात देखभाल की। इसी का नतीजा है कि पहले जहां पथरीली-उजाड़ जमीन थी, वहां अब हजारों पेड़-पौधे खड़े हैं। ये किसान हैं राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में सुरास ग्राम पंचायत के नाहरगढ़ निवासी 60 वर्षीय भगवत सिंह राणावत। वे बताते हैं- जब मैं सड़क किनारे चरागाह की बंजर जमीन देखता था तो मन में टीस उठती थी। फिर मैंने साल 2021 में कंकड़-पत्थर हटाकर जमीन सही की। गड्ढे खोदकर नीम, बड़, पीपल, अमरूद आदि के पौधे लगाना शुरू किया। लेकिन चिंता थी कि पौधों की सुरक्षा कैसे होगी। इसके लिए पास में बनास नदी में जिस व्यक्ति के पास बजरी की लीज (ठेका) था, उससे आग्रह किया। उससे 50 बीघा जमीन पर तारबंदी कराई। इससे पौधे सुरक्षित बढ़ने लगे। ढाई साल में 5 लाख रुपए का पानी दिया राणावत ने बताया, चरागाह में पानी नहीं था। हर 15 दिन पर 16 टैंकर पानी देना पड़ता था। एक टैंकर 500 रु. का था। पानी देने में ही करीब 5 लाख रुपए खर्च हुए। तब करीब 2500 पौधे लगाए थे। जो पौधा नष्ट होता, उसकी जगह दूसरा लगा देता। जैविक जंगल... केवल देसी बीज-खाद का प्रयोग किया किसान राणावत ने बताया, चरागाह में भी केवल देसी बीजों और देसी खाद का ही उपयोग किया। ज्यादातर पौधे अब पेड़ बन चुके हैं। पक्षी चहचहाते नजर आते हैं। खरगोश, लोमड़ी जैसे वन्यजीव आने लगे हैं।