बाड़मेर की पचपदरा रिफाइनरी देश की सबसे हाईटेक और भव्य परियोजनाओं में से एक है। 4 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस 80 हजार करोड़ के मेगा प्रोजेक्ट का उद्घाटन करने जा रहे हैं। यह मेगा प्रोजेक्ट 'आत्मनिर्भर भारत' का जीवंत उदाहरण है। रिफाइनरी के अधिकांश भारी-भरकम रिएक्टर, कॉलम और टैंक भारत में ही तैयार हुए हैं। हालांकि, इसका 'दिमाग' यानी कंट्रोल सिस्टम और हाई-प्रेशर कंप्रेसर पूरी तरह अमेरिका, जापान और यूरोप की तकनीक पर आधारित हैं। रिफाइनरी की इंटरनेशनल लेवल की फिनिशिंग और वेल्डिंग गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नीदरलैंड के विशेषज्ञ तकनीशियनों ने पचपदरा की तपती धूप में पसीना बहाया है। निर्माण में इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड और जैसी भारतीय दिग्गज कंपनियों के साथ लमस टेक्नोलॉजी जैसी ग्लोबल कंपनियों का साझा विजन शामिल है। मेहनत: मेगा प्रोजेक्ट दिग्गज कंपनियों का साझा विजन इस मेगा प्रोजेक्ट के पीछे दुनिया के सबसे बड़े तकनीकी दिमागों ने काम किया है। निर्माण में इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) ने कमान संभाली थी। वहीं लमस टेक्नोलॉजी, UOP और यूनिवेशन टेक्नोलॉजीज जैसी ग्लोबल कंपनियों ने अपनी पेट्रोकेमिकल और क्रैकर यूनिट्स की तकनीक प्रदान की है। निर्माण कार्य में MEIL जैसी भारतीय दिग्गज कंपनियां दिन-रात जुटी हैं। संयोग: 2 बार शिलान्यास, 2 बार उद्घाटन तारीख 1. अग्निकांड का खौफ: प्रशासन के जेहन में 20 अप्रैल की वह घटना आज भी ताजा है। तब जनसभा के लिए करोड़ों का भव्य डोम सज चुका था। भीषण अग्निकांड ने सारे अरमान खाक कर दिए। इस बार कोई जोखिम नहीं लिया जा रहा है। 2. मानसून की चुनौती, नमक का दलदल: दूसरी सबसे बड़ी अड़चन। मानसून सीजन शुरू हो चुका है। पचपदरा का इलाका अपनी नमक की खानों के लिए जाना जाता है। बारिश की चंद बूंदें ही इस पूरे क्षेत्र को फिसलन भरे दलदल में तब्दील कर देती हैं।