बुआई के दौरान खाद–बीज की कमी को लेकर गत वर्षों में आई दिक्कतों के अनुभव के आधार पर कृषि विभाग आगामी मानसून से पहले अभियान चलाने वाला है। इसके लिए 15 मई से विभागीय अफसरों-कर्मचारियों की टीमें फील्ड में जाएंगी। टीमें खाद–बीज के सैंपल लेने के साथ स्टॉक चेक किया जाएगा। अभियान में यूरिया की कालाबाजारी को लेकर भी औद्योगिक इकाइयों को जांचा जाएगा। कृषि आयुक्तालय ने इसे लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उनमें बताया गया है कि किसानों को खरीफ सीजन के दौरान गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने के लिए राज्यव्यापी सघन गुण नियंत्रण अभियान चलाया जाएगा, जो 15 मई से शुरू होकर 10 जुलाई तक अमानक और नकली सामग्री की बिक्री को रोकने के लिए टीमें निरीक्षण करेंगी। ताकि किसानों को फसल बुआई के समय कोई तकलीफ न हो। इसकी मॉनिटरिंग की पुख्ता व्यवस्था की गई है। निरीक्षकों को मौके से ही खाद, बीज और कीटनाशकों के नमूने ऑनलाइन दर्ज करने होंगे। साथ ही साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट देनी होगी। निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई निरीक्षक प्रविष्टि में गलती करता है या समय पर ऑनलाइन अपडेट नहीं करेगा तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। खरीफ व रबी सीजन में 19 हजार से ज्यादा नमूने प्रस्तावित हैं। इनमें अकेले खाद के 11 हजार सैंपल होंगे। साथ-साथ 8 हजार एसएसपी नमूने लेने तय किया है। उर्वरक श्रेणी में सर्वाधिक एसएसपी 50%, यूरिया 1%, डीएपी 2% और एनपीके 12% की जांच होगी। बीज श्रेणी में 12 हजार से ज्यादा नमूनों में से एक हजार बीटी कॉटन और इतने ही सब्जियों के बीजों के लिए जाएंगे। जांच में अमानक पाए जाने पर निरीक्षकों को 15 दिनों के भीतर नोटिस और 30 दिनों के भीतर सक्षम न्यायालय में वाद दायर किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि खाद, बीज व कीटनाशक विक्रेताओं के लिए यह अनिवार्य है कि वे प्रतिष्ठान में मूल लाइसेंस, अपडेट स्टॉक रजिस्टर और मूल्य सूची चस्पा करें। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन पाए जाने वाले प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबन और निरस्तीकरण की कार्यवाही भी मौके पर ही की जा सकेगी। सीमावर्ती जिलों में परिवहन पर रहेगी विशेष नजर अभियान के दौरान सीमावर्ती जिलों के लिए विशेष टीमें बनाई जाएगी। इस दायरे में पड़ोसी राज्यों की सीमा पर स्थित जिले भी आएंगे। धौलुपर, झुंझुनूं, अलवर, भरतपुर, श्रीगंगानगर, जैसलमेर, बाड़मेर, फलोदी, जालोर, हनुमागढ़, बीकानेर सहित कई जिले शामिल है। यहां बाहरी राज्यों से आने वाली संदिग्ध सामग्री की भी जांच की जाएगी। इन क्षेत्र में जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस और प्रशासन का सहयोग लिया जाएगा। जून और सितंबर के महीनों में सर्वाधिक 15-15 प्रतिशत नमूनों का लक्ष्य रखा गया है। इस दौरान फसल बुआई का पीक सीजन होता है।