पत्नी और 4 बच्चों को पति प्रतिमाह 5000 रुपए भी नहीं दे सका। फैमिली कोर्ट के सामने पति ने असमर्थता जताई तो कोर्ट ने उसे 660 दिन सिविल कारावास की सजा सुना दी। मामला टोंक का है। फैमिली कोर्ट के जज मधुसूदन शर्मा ने 29 जून को फैसला सुनाया। चारों मामलों में 1.90 लाख रुपए देने थे, लेकिन आरोपी पति ने इतनी ज्यादा राशि देने में असमर्थता जताई है। कोर्ट रीडर मोहम्मद आहसन मदनी ने बताया- टोंक में पुराने शहर के शेख मोहल्ला में रहने वाली नईमुन्निसा की शादी 2007 में अल्ताफ खान से हुई थी। दोनों के 4 बच्चे हुए। 2015 में अल्ताफ ने पत्नी नईमुन्निसा और बच्चों को घर से निकाल दिया। पति के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस लगाया इसके बाद अक्टूबर 2015 में नईमुन्निसा ने टोंक महिला थाने में मारपीट और दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज करा दिया। 2017 में उसने फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण का परिवाद दायर कर दिया। 30 मार्च 2019 को अदालत ने पत्नी के पक्ष में फैसला दिया। आदेश में कोर्ट ने कहा- अल्ताफ खान को पत्नी और चार बच्चों को 5 हजार रुपए प्रतिमाह (प्रति व्यक्ति एक-एक हजार) नियमित भरण-पोषण राशि देनी होगी। आदेश के बावजूद जमा नहीं की राशि कोर्ट के आदेश के बावजूद अल्ताफ ने राशि जमा नहीं कराई। इस पर नईमुन्निसा ने साल 2023, 2024, 2025 और 2026 में अलग-अलग वसूली प्रार्थना-पत्र अदालत में पेश किए। इस दौरान आरोप अल्ताफ एक मामले में जेल में बंद था। उसे प्रोडक्शन वारंट के जरिए उसे 29 जून 2026 को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट में अल्ताफ ने कहा- मैं भरण पोषण की राशि जमा करने में समर्थ नहीं हूं। इस पर फैमिली कोर्ट ने चारों वसूली प्रकरणों में अल्ताफ को 660 दिन की सिविल कारावास की सजा सुनाई। अदालत के इस आदेश को भरण-पोषण मामलों में न्यायालय के सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है।