उदयपुर में जल्द ही ऐसा आर्किटेक्ट्स टॉवर बनाया जाएगा, जहां सूर्य की रोशनी से समय का पता चलेगा। शहर के एक प्रमुख चौराहे पर बनने वाला यह 35 फीट ऊंचा टॉवर महाराणा कुंभा के प्रसिद्ध वास्तुकार मंडन को समर्पित होगा। इस परियोजना का उद्देश्य उदयपुर की स्थापत्य विरासत को नई पहचान देना और ऐतिहासिक वास्तुकला को आधुनिक स्वरूप में प्रस्तुत करना है उदयपुर शहर के शोभागपुरा से यूनिवर्सिटी जाने वाली 100 फीट सड़क पर बनने जा रहे नए चौराहा पर आर्किटेक्ट्स टॉवर का निर्माण किया जा रहा है। उदयपुर विकास प्राधिकरण के इस चौराहा पर उदयपुर के आर्किटेक्ट सुनील लड्ढा ने अपने स्तर पर इसका निर्माण करने का मन बनाया। यूडीए के साथ हुए अनुबंध के तहत यह निर्माण किया जा रहा है। आर्किटेक्ट लड्ढा ने बताया कि यह टॉवर केवल एक आर्किटेक्चरल संरचना नहीं होगा, बल्कि देश के आर्किटेक्ट्स, शिल्पियों और डिजाइनर्स के योगदान को सार्वजनिक सम्मान देने का प्रतीक बनेगा। मंडन 15वीं शताब्दी में महाराणा कुंभा के थे प्रधान आर्किटेक्ट वे बताते है कि मंडन 15वीं शताब्दी में महाराणा कुंभा के प्रधान आर्किटेक्ट थे। उनके मार्गदर्शन में विश्व प्रसिद्ध कुंभलगढ़ दुर्ग का निर्माण हुआ। उन्होंने प्रासादमंडन, राजवल्लभ, रूपमंडन और वास्तुमंडन जैसे वास्तुशास्त्र के महत्वपूर्ण ग्रंथ भी लिखे, जिन्हें आज भी अध्ययन का आधार माना जाता है। उन्होंने बताया कि मेवाड़ के महान सूत्रधार मंडन को यह विरासत समर्पित होगी। टॉवर की खास बात इसमें लगाया जाने वाला वर्टिकल सन डायल (ऊर्ध्वाधर सूर्य घड़ी) होगा, जो सूर्य की रोशनी से समय बताएगा। इस प्रोजेक्ट की टेक्निकल सहयोगी युवा आर्किटेक्ट प्रियंका कोठारी ने बताया कि यह भारतीय ज्ञान परंपरा, विज्ञान और आधुनिक आर्किटेक्चर का अनूठा संगम होगा। सुनील लड्ढा के अनुसार, दुनिया में राजाओं और ऐतिहासिक व्यक्तियों के सम्मान में कई स्मारक हैं, लेकिन सभ्यताओं को आकार देने वाले आर्किटेक्ट्स और शिल्पियों के लिए सार्वजनिक स्मारक बहुत कम हैं। इसी सोच के साथ इस टॉवर की कल्पना की गई है। करीब 32 से 35 लाख रुपए होंगे खर्च वे बताते है कि रात में आकर्षक लाइटिंग और अनोखी डिजाइन के कारण यह टॉवर पर्यटकों, आर्किटेक्ट्स, इंजीनियरों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। भविष्य में इसे उदयपुर की नई पहचान और आर्किटेक्चर टूरिज्म के प्रमुख लैंडमार्क के रूप में विकसित करने की योजना है। लड्ढा कहते है कि उनकी इच्छा थी कि वे आर्किटेक्ट्स से जुड़ी चीज इस शहर में सार्वजनिक स्थान पर दिखाए और इसी के तहत उन्होंने अपने स्तर पर ये काम हाथ में लिया और करीब सवा महीने में ये तैयार हो जाएगा। उन्होंने बताया कि इस पर करीब 32 से 35 लाख रुपए खर्च होंगे।