उदयपुर की मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के आर्ट्स कॉलेज में एक गिलहरी का आतंक है। पिछले 1 महीने में गिलहरी 18 से ज्यादा लोगों पर हमला कर चुकी। हैरत की बात यह है कि कॉलेज में एनिमल एड की टीम भी आई, मगर गिलहरी को पकड़ नहीं पाई। दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने कॉलेज पहुंचकर स्टूडेंट्स, कॉलेज स्टाफ से बात की तो तक हर कोई गिलहरी के काटने की बात से परेशान दिखा। स्टूडेंट्स कॉलेज के बाहर खुले मैदान में बैठने से भी बच रहे हैं। दूसरी गिलहरियों से भी लग रहा डर आर्ट्स कॉलेज में बाबू दिनेश चंद्र गुर्जर ने बताया- गिलहरी कॉलेज में आते-जाते लोगों पर हमला कर रही है। उन्हें काट रही है। मैंने खुद यह देखा है। 22 अप्रैल को मेरे विभाग में ही दो स्कॉलर्स को गिलहरी ने काट लिया था। उसके अगले दिन जब मैं सुबह ऑफिस आया तो वह पर्दों के पीछे छिपी थी। अचानक मेरे ऊपर कूद गई। मैं वहां से भाग गया, इसलिए मुझे नहीं काटा। दिनेश ने बताया- इसका खौफ इतना बढ़ गया है कि लोग आसपास घूमने वाली सामान्य गिलहरी से भी डरने लगे हैं। उन्हें लगता है कि कहीं यह वही गिलहरी तो नहीं है। जो काट लेगी। जिन लोगों को काटा है, डॉक्टर की सलाह पर उन्हें लगातार रेबीज के इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। अब जानिए- किसने क्या कहा… सोशल साइंस एंड ह्यूमैनिटीज कॉलेज की एक स्कॉलर ने बताया कि साइकोलॉजी और वुमेन स्टडीज डिपार्टमेंट की गैलरी की तरफ एक गिलहरी है। उसने मेरे हाथ पर काट लिया था। मैंने उसे झटका दिया और बाहर आ गई। इसके बाद उसने पास बैठी दूसरी स्कॉलर के हाथ पर भी हमला किया। दर्शनशास्त्र विभाग में काम करने वाली महिला कर्मचारी डाली मेघवाल ने बताया- रेस्क्यू टीम भी गिलहरी को पकड़ने आई थी, लेकिन वह उनके हाथ नहीं आई। यह गिलहरी लोगों के पीछे पड़ जाती है और उन्हें काट लेती है। कॉलेज स्टूडेंट कृतिका राव ने बताया कि यह गिलहरी यहां फरवरी के महीने से घूम रही है। कॉलेज की जितनी भी फैकल्टी और स्टाफ यहां से निकलते हैं, वह उनके पीछे भागती है। यह कमरों के अंदर घुस जाती है। कॉलेज स्टूडेंट कृष्णा ने बताया कि कैंपस में पिछले कुछ समय से एक गिलहरी ने परेशान कर रखा है। हमने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की कि उसे सुरक्षित तरीके से पकड़कर बाहर निकाल दिया जाए ताकि वह किसी को नुकसान न पहुंचा सके। लेकिन वह बहुत ही ज्यादा फुर्तीली थी और हमारे हाथ नहीं आई। डीन बोले- रेस्क्यू नहीं कर पाई टीम आर्ट्स कॉलेज के डीन प्रोफेसर मदन सिंह राठौड़ ने बताया- कुछ दिन पहले यह मामला नॉलेज में आया था। कॉलेज के स्टाफ को रेस्क्यू के लिए कहा भी था। रेस्क्यू टीम आई भी, मगर इसका रेस्क्यू नहीं हो पाया। स्टूडेंट्स ने बताया कि यह गिलहरी काफी अग्रेसिव है। किसी को देखते ही लपकती है। वापस टीम बुलाकर रेस्क्यू करवाएंगे। एक्सपर्ट बोले- गर्मी या भूख हो सकता है कारण पीपुल्स फॉर एनिमल्स उदयपुर के प्रेसिडेंट सत्यजीत रॉय ने बताया- ये वाइल्ड एनिमल है। ज्यादा गर्मी होने पर ब्रेन डिसऑर्डर हो सकता है। इस कारण उसके काटने की हेबिट हो सकती है। भूख से भी ऐसा हो सकता है। गिलहरी के दांत तीखे होते हैं। आमतौर पर गिलहरी काटती नहीं है। काटने के पीछे उसके दिमागी संतुलन का डिस्टर्ब होना हो सकता है। पूरी जानकारी के बाद रेस्क्यू की कोशिश करेंगे, आमतौर पर गिलहरी का रेस्क्यू करना मुश्किल होता है। वन्यजीव डॉ हिमांशु व्यास ने बताया- अपने बच्चे के बचाव के चलते भी वो ऐसा कर सकती है। पहली बार ऐसा सुनने को मिला है। आज तक ऐसा केस नहीं देखा है। 1 महीने में कई लोगों को काटना भी हैरानी भरा है। गिलहरी के साइॅकोजिकल इशू के कारण भी काटने की हैबिट्स भी हो सकती है। ऐसा कभी होता नहीं है। इस केस की स्टडी के बाद ज्यादा कुछ कहा जा सकता है। ये कोई टेंपरामेंटल केस भी हो सकता है। संभवतया बचाव के लिए ये हमला कर रही हो। हो सकता है किसी ने पहले पाला हो फिर छोड़ दिया हो। इसलिए इंसानों का डर नहीं रहा हो। आरएनटी मेडिकल कॉलेज उदयपुर के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. ओ. पी. मीणा ने बताया- गिलहरी का काटना सामान्य नहीं है। इससे शरीर में गंभीर संक्रमण और रेबीज फैलने का बड़ा खतरा रहता है। यदि सही समय पर इलाज न मिले तो यह मरीज में हाइड्रोफोबिया जैसी स्थिति पैदा कर सकता है, जिसमें व्यक्ति को पानी से डर लगने लगता है।