​कहते हैं कि जोड़ियां ऊपर वाला बनाता है, लेकिन जब रिश्तों में दरार आ जाए तो उसे सुलझाने में समय और समझ दोनों की जरूरत होती है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां करीब 7 वर्षों से अलग रह रहे एक पति-पत्नी ने आखिरकार अपने गिले-शिकवे भुलाकर फिर से साथ रहने का फैसला किया है। ​2015 में हुई थी शादी, फिर बढ़ी दूरियां ​एडवोकेट समर पंड्या ने बताया कि उदयपुर निवासी संदीप आमेटा पिता हेतशंकर आमेटा और लोहारिया निवासी निशा आमेटा पुत्री दिनेश चंद्र दवे का विवाह 21 अप्रैल 2015 को हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ था। शादी के कुछ समय बाद तक सब ठीक रहा और उनका एक बेटा भी हुआ, जिसका नाम पार्थ है और वह अब 9 वर्ष का है। लेकिन वैचारिक मतभेदों के चलते पिछले 7 वर्षों से दोनों अलग रह रहे थे। ​कानूनी लड़ाई से समझौते तक का सफर संदीप ने तलाक की याचिका दायर की थी, वहीं निशा ने दाम्पत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना और भरण-पोषण के लिए याचिकाएं लगाई थीं। पारिवारिक न्यायालय, बांसवाड़ा के समक्ष दोनों ने आपसी राजीनामे के आधार पर सभी पुराने विवादों को भुलाकर नई शुरुआत करने का संकल्प लिया है। ​अब कोई आरोप-प्रत्यारोप नहीं ​दोनों पक्षों ने कोर्ट में लिखित आश्वासन दिया है कि वे भविष्य में एक-दूसरे पर कोई आरोप नहीं लगाएंगे और न ही कोई कानूनी कार्रवाई करेंगे। इस अवसर पर संदीप के पिता हेतशंकर आमेटा और निशा की माता सुलोचना देवी भी उपस्थित रहीं।