राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने उदयपुर के सीएमएचओ डॉ. शंकरलाल बामणिया को बड़ी राहत दी। बामणिया के खिलाफ टेंडर अनियमितता मामले में चल रही (धारा 17-ए के तहत) एसीबी जांच और कानूनी कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने प्रारंभिक तौर पर इस कार्रवाई को सुनियोजित और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए सख्त टिप्पणी भी की। करीब डेढ़ माह पहले राज्य सरकार ने इनके खिलाफ करप्शन एक्ट के तहत जांच शुरू करने की अनुमति दी थी। उदयपुर में फिलहाल दो सीएमएचओ हैं- डॉ. अशोक आदित्य और डॉ. शंकरलाल बामणिया। विभागीय पावर डॉ, आदित्य के पास है, जबकि बामणिया राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर लगे हुए हैं। दोनों सीएमएचओ के बीच लंबे समय से दोनों में टकराव की स्थिति बनी हुई है। ये था पूरा मामला एसीबी के पास डॉ. शंकरलाल बामणिया के खिलाफ पद के दुरुपयोग और टेंडरों में अनियमितता की शिकायत आई थी। इसकी शुरुआती जांच करने पर उसे विस्तृत जांच के बाद कार्रवाई योग्य माना गया। एसीबी ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर बताया था कि लोक सेवक द्वारा अपने शासकीय कर्तव्यों के निवर्हन में की गई गड़​बड़ियों की जांच के लिए 17-ए की अनुमति जरूरी है। इसके बाद सरकार ने इसकी जांच की अनुमति प्रदान कर दी थी। डॉ. आदित्य को डीडीओ पावर मिले, तीनों फर्मों को दिए टेंडर मामले में डॉ. बामणिया ने कहा कि डॉ. अशोक आदित्य को जब डीडीओ पावर मिले तो उन्होंने वही तीनों फर्मों को टेंडर दे दिए। मेरे खिलाफ एक ऐसे व्यक्ति ने शिकायत की, जिसने अपना एड्रेस गलत लिखा। साइन नहीं किए और मोबाइल नंबर भी नहीं था। ------------ मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… कुर्सी के लिए जंग, उदयपुर में अब दो CMHO:हाईकोर्ट स्टे से डॉ. बामणिया ने वापस कुर्सी संभाली, सरकार ने डॉ. आदित्य को बनाया था CMHO उदयपुर में अब दो सीएमएचओ हो गए। डॉ. अशोक आदित्य 5 दिन पहले राजस्थान सरकार के आदेश से सीएमएचओ बने थे। वहीं, मंगलवार सोमवार देर शाम डॉ. शंकर बामणिया ने हाईकोर्ट से स्टे लेकर वापस सीएमएचओ की कुर्सी संभाल ली। हाईकोर्ट स्टे लेकर डॉ. बामणिया 10 से 15 समर्थकों के साथ ज्वाइन करने पहुंचे। तब दफ्तर में सीएमएचओ की कुर्सी पर डॉ. आदित्य बैठै हुए थे। (पूरी खबर पढ़ें…)