उदयपुर में 16 जुलाई को निकलने वाली भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथयात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में है। जगदीश मंदिर से शाही अंदाज में भगवान जगन्नाथ की देश की तीसरी सबसे बड़ी रथयात्रा निकाली जाएगी, जो दोपहर 3 बजे शुरू होगी। रथयात्रा को लेकर शहरवासियों और श्रद्धालुओं में उत्साह है। रथयात्रा मार्ग पर सुरक्षा से लेकर स्वागत तक के सभी पुख्ता इंतजाम​ किए गए है। चांदी के रथ में सवार होंगे भगवान इस बार की भी रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ स्वामी चांदी के रजत रथ पर माता लक्ष्मी और दानीराय जी के साथ विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। भगवान के स्वागत के लिए पूरे रथयात्रा मार्ग और श्रद्धालुओं के घरों की छतों पर 11 हजार ध्वजा-पताकाएं (झंडे) लगाई जाएंगी। रथयात्रा में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित आकर्षक झांकियां सजाई जाएंगी। इसके साथ ही पांच अलग-अलग बैंड की मधुर धुनें, भजन मंडलियां, ऊंट-घोड़े और शाही लवाजमा इस यात्रा की शोभा बढ़ाएंगे। यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं सिर पर कलश धारण कर मंगलगीत गाते हुए शामिल होंगी, जबकि श्रद्धालु भक्त संगीत और जयघोष के बीच नृत्य करते हुए नजर आएंगे। 10 हजार श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी का इंतजाम रथयात्रा में शामिल होने वाले भक्तों के लिए बड़े पैमाने पर भोजन और प्रसादी की व्यवस्था की गई है। आसींद की हवेली पार्किंग में जगन्नाथ अन्न क्षेत्र मानव समिति की तरफ से करीब 10 हजार श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी (भोजन) का इंतजाम रहेगा। इसके अलावा पूरी रथयात्रा के मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए ठंडा पानी और आइसक्रीम समेत कई तरह के प्रसाद और अल्पाहार बांटे जाएंगे ताकि भक्तों को कोई परेशानी न हो। सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सुरक्षा के कड़े इंतजाम रथयात्रा के दौरान शहर के राजस्थान महिला विद्यालय के अमल का कांटा चौराहे पर कलाकारों द्वारा सुंदर भजन और कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने के लिए पूरे रूट पर पैनी नजर रखी जाएगी। सुरक्षा के लिए मार्ग पर एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की व्यवस्था रहेगी।रथयात्रा समिति ने श्रद्धालुओं से विशेष अपील की है कि वे यात्रा मार्ग पर किसी भी तरह की आतिशबाजी न करें। 23 फीट से कम ऊंचाई के स्वागत द्वार न बनाएं। विभिन्न समाजों और संगठनों की ओर से रथयात्रा के लिए ध्वजा-पताकाओं का वितरण भी कर दिया गया है। 375 साल पुराना है जगदीश मंदिर उदयपुर का प्रसिद्ध जगदीश मंदिर करीब 375 साल पुराना है, जिसका निर्माण साल 1651 में महाराणा जगतसिंह प्रथम ने करवाया था। यह भव्य मंदिर वास्तुकला की इंडो-आर्यन शैली में बना है, जहां भगवान विष्णु (जगन्नाथ) की काले पत्थर की चार भुजाओं वाली सुंदर मूर्ति स्थापित है। यहां भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकालने की परंपरा सदियों पुरानी है, जो मेवाड़ राजपरिवार के समय से ही श्रद्धापूर्वक चली आ रही है। पुरी और अहमदाबाद के बाद इसे देश की तीसरी सबसे बड़ी रथयात्रा माना जाता है, जिसमें मेवाड़ ही नहीं बल्कि देशभर से लाखों श्रद्धालु शामिल होने आते हैं।