भास्कर संवाददाता|श्रीगंगानगर देवभूमि उत्तराखंड की चारधाम यात्रा इस साल रिकॉर्ड तोड़ रही है, लेकिन आस्था के इस सैलाब के बीच श्रद्धालुओं से की जा रही मनमानी वसूली उनके लिए परेशानी का सबब बन रही है। चारधाम यात्रा से लौटकर श्रीगंगानगर आए कई श्रद्धालुओं ने केदारनाथ क्षेत्र में महंगाई और कथित मनमानी वसूली की शिकायतें की हैं। यात्रियों का कहना है कि रिकॉर्ड भीड़ के बीच पानी, ठहरने और स्थानीय परिवहन के दाम तेजी से बढ़ गए हैं। यात्रियों के मुताबिक केदारनाथ में 10 हजार की पालकी, 6 हजार का टेंट, 20 रुपए वाली पानी की बोतल 150 रुपए में मिल रही है। इससे यात्रा व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं। चारधाम यात्रा 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुलने के साथ शुरू हुई थी। यात्रा का मंगलवार को 10वां दिन रहा। श्रीगंगानगर जिले से अब तक 500 से ज्यादा लोग यात्रा कर चुके हैं। कई अन्य श्रद्धालुओं ने पंजीयन कराया है। वे यात्रा की तैयारी में हैं। श्रद्धालु सुभाष नागपाल ने बताया कि केदारनाथ धाम में पानी की बोतल के दाम सामान्य बाजार की तुलना में कई गुना अधिक वसूले जा रहे हैं। मैदानी इलाकों में 20 रुपए में मिलने वाली बोतल वहां 150 रुपए तक में बेची जा रही है। यात्रियों ने प्रशासन से एमआरपी के पालन और निगरानी की मांग की है। श्रद्धालु ऑनलाइन पंजीयन करवा सकते हैं, इसके अलावा कई और विकल्प मौजूद : श्रद्धालु उत्तराखंड टूरिज्म की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन फॉर्म भरकर पंजीयन कर सकते हैं। टूरिस्ट केयर उत्तराखंड मोबाइल एप के माध्यम से भी रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध है। यात्री टोल फ्री नंबर 91-8394833833 पर अंग्रेजी में Yatra लिखकर मैसेज भेजकर भी पंजीयन करा सकते हैं। टोल-फ्री नंबर 0135-1364 पर कॉल कर सहायता ले सकते हैं। ऑनलाइन सुविधा का उपयोग न कर पाने वाले श्रद्धालु ऋषिकेश और हरिद्वार में बनाए काउंटरों पर ऑफलाइन पंजीयन करा सकते हैं। यह प्रक्रिया निशुल्क है। यात्रियों का कहना है कि खच्चर और पालकी सेवाओं के किराए भी बढ़े हैं। इसमें पिछले साल की तुलना में करीब 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी है। भीड़ और मौके पर मोलभाव के कारण कई बार अधिक भुगतान करना पड़ रहा है। यात्रियों के अनुसार खच्चर का किराया जाने के लिए 3,500 रुपए और वापसी के लिए 2,300 रुपए तक लिया जा रहा है। पालकी के लिए जाने का किराया 10,000 रुपए और वापसी का 6,000 रुपए है। केदारपुरी में ठहरने की जगहों की कमी के कारण टेंट और कमरों के किराए बढ़ गए हैं। बजट से बाहर होने के कारण कुछ लोगों को सड़क किनारे या खुले में रात गुजारनी पड़ रही है।