भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा बारिश का दौर शुरू होने से पहले शहरवासियों को टूटी सड़कों से राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन इस बार भी सड़कों की मरम्मत पिछले साल की तरह अधूरी रहने वाली है। परिषद ने शहर की क्षतिग्रस्त सड़कों के पेचवर्क के लिए करीब 45-45 लाख रुपए के टेंडर तो जारी किए थे, लेकिन समय पर वर्कऑर्डर जारी नहीं किए। अब मानसून से पहले आनन-फानन में परिषद ने सीसी सड़कों के पेचवर्क के लिए संवेदक फर्म बाबा कंस्ट्रक्शन को वर्क ऑर्डर जारी किए हैं। अब यह फर्म सीसी और डामर सड़कों के पेचवर्क का काम देखेगी। अधिकारियों का कहना है कि डामर सड़कों के पेचवर्क के लिए संवेदक फर्मों ने हाथ खड़े कर दिए, जिसके चलते वर्कऑर्डर जारी नहीं हो सके। तकनीकी जानकारों का कहना है कि डामर और कंक्रीट की पकड़ अलग-अलग होती है। ऐसे में डामर सड़क पर डाली गई कंक्रीट तेज बारिश या लगातार वाहनों के दबाव में उखड़ सकती है। कुछ ही दिनों में सड़कों के फिर पहले जैसी स्थिति में पहुंचने की आशंका है। डामर सड़क की मरम्मत डामर मिश्रण से और सीमेंट-कंक्रीट का उपयोग केवल कंक्रीट सड़कों के लिए ही तकनीकी रूप से उपयुक्त माना जाता है। इसके अलावा यदि डामर सड़क के बीच में कंक्रीट से पेचवर्क का काम करते हैं तो सबसे पहले कंक्रीट का रेशो सही होना चाहिए। इसे डामर के बीच डालने के बाद कम से कम एक दिन का समय जमने के लिए चाहिए होता है। सड़क पर चलते ट्रैफिक के बीच गिट्टी डिस्टर्ब यानी हिलने लगती है। इसके चलते वह पकड़ नहीं बना पाती और फिर धीरे-धीरे उखड़ने लगती है। इसकी मजबूती के लिए ट्रैफिक को एक दिन के लिए बंद कर देना चाहिए। पेचवर्क के बाद तेज बारिश नहीं हो। इसके ऊपर गीला टाट या बोरा डालकर लगातार दो से तीन दिन तक तराई की जानी चाहिए। केस-1. दुकानदार दीपक कंसारा ने बताया कि यह स्थायी समाधान नहीं, केवल खानापूर्ति है। गड्ढे भरने के लिए घटिया सीमेंट और रेती का उपयोग किया जा रहा है। शिकायत के बावजूद कोई सुनने को तैयार नहीं है। बारिश में इन गड्ढों से वाहन निकलते हैं तो कीचड़ के छींटे दुकानों के भीतर तक पहुंच जाते हैं। ग्राहकों के कपड़े खराब हो जाते हैं। शहर के प्रमुख मार्गों पर इन दिनों इसी तरह गड्ढे भरे जा रहे हैं। इसके चलते मंगलवार को कस्टम चौराहा से लेकर कुशलबाग मैदान तक गड्ढों को सीमेंट, बजरी और गिट्टी मिलाकर भर दिया गया। इन गड्ढों के ऊपर से ही दिनभर वाहन निकलते रहे। ऐसे में शाम होते-होते कई जगह से यह कंक्रीट दबी और उखड़ी हुई नजर आई। इधर, नगर परिषद के अधिकारियों का तर्क है कि डामर उपलब्ध नहीं होने के कारण फिलहाल लोगों को राहत देने के लिए यह अस्थायी उपाय करवा रहे हैं। केस-2. दुकानदार नीलेश सेठ का कहना है कि जनता के टैक्स से मिलने वाली राशि हर साल इसी तरह से पानी में बहा दी जाती है। हर साल बारिश से पहले सड़क मरम्मत के दावे किए जाते हैं, लेकिन समय पर काम शुरू नहीं होने से लोगों को पूरे मानसून में खराब सड़कों पर आवाजाही करनी पड़ती है। सीमेंट, रेती डालकर खानापूर्ति कर रहे हैं। एक ही बारिश में यह गड्ढे फिर से लोगों की मुसीबत बढ़ाएंगे। संदीप चेलावत, रिटायर्ड एक्सईएन