अलवर नगर निगम चुनाव को लेकर भाजपा ने प्रचार अभियान तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 7 सितंबर को अलवर आएंगे। खास बात यह है कि वार्ड पार्षदों के चुनाव में अलवर शहर में पहली बार मुख्यमंत्री का रोड शो आयोजित किया जा रहा है। रोड शो के जरिए CM भजनलाल शर्मा भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में वोट मांगेंगे और चुनावी अभियान को धार देंगे। हालांकि, अभी सीएम भजनलाल शर्मा का कार्यक्रम आना बाकी है। वहीं अलवर में कांग्रेस के बड़े नेता राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह भी बराबर का जवाब देने की तैयारी में जुटे हैं। बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने मेयर की कुर्सी के लिए झोंकी ताकत अलवर नगर निगम के चुनाव में मेयर की कुर्सी तक पहुंचने के लिए बीजेपी के छोटे से बड़े नेताओं ने अपनी ताकत झोंक दी है। पहली बार अलवर में पार्षद के चुनाव में प्रदेश के मुखिया भजनलाल शर्मा रोड शो करने आएंगे। उनके साथ केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और वन राज्य मंत्री संजय शर्मा भी रहेंगे। रोड शो प्रातः 11:30 बजे श्री जगन्नाथ जी मंदिर पुराना कटला, सुभाष चौक से आरंभ होगा। जो शहर के मुख्य बाजार से निकलता हुआ अहिंसा स्थल (मन्नी का बड़) पहुंचेगा।
रोड शो सराफा बाजार से त्रिपोलिया, होपसर्कस , घंटाघर , नगर परिषद तिराहे , नगर परिषद, चर्च रोड, मन्नी का बड़ अहिंसा स्थल पर समापन होगा । 4 दिन बाद 9 सितंबर को वोटिंग होगी। उसके बाद चयनित पार्षद मिलकर मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव करेंगे। निकाय चुनावों में दिखेगा जेन जी का असर देश भर में GEN-Z के आंदोलन के बाद राजस्थान में निकाय के चुनाव होने जा रहे हैं। जिस पर पूरे देश की नजर है। हर कोई इन चुनावों में GEN-Z वोटर का असर देखना चाहते हैं। सबका अलग-अलग अनुमान है। लेकिन वोटिंग के परिणाम के बाद ही लोगों के कयासों को समझा जा सकेगा। इस कारण बीजेपी भी निकाय के चुनाव को हर संभव जीत में बदलना चाहती है। ताकि उनकी केंद्र और राज्य की सरकार पर उठे सवाल खुद ही दब सकें। अलवर नगर निगम में 65 वार्ड, 344 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे अलवर नगर निगम बनने के बाद यह पहला चुनाव है। 65 वार्ड में 344 प्रत्याशी खड़े हैं। कांग्रेस का एक प्रत्याशी कम है, जिनका नामांकन खारिज कर दिया गया। पिछली बार नगर परिषद के चुनाव हुए थे। लेकिन वार्ड तब भी 65 ही थे। उस समय कांग्रेस की सरकार रहते हुए बीजेपी के 65 में से 27 पार्षद जीते थे, जबकि कांग्रेस के 19 ही जीतकर आए थे। इसके बावजूद कांग्रेस ने अपना चेयरमैन बना लिया था। लेकिन बाद में कांग्रेस के राज में उनकी चेयरमैन एसीबी से ट्रैप हो गई थी। उसके बाद बीजेपी के उप सभापति को ही सभापति बनाना पड़ गया था। बाद में नगर निगम बनते ही उनका पद चेयरमैन से मेयर हो गया था। लेकिन निगम बनने के बाद यह पहला चुनाव है। कई बड़े चेहरे मैदान में- बड़े नेताओं के खास भी नगर निगम के वार्ड पार्षद के चुनाव में कई बड़े नेताओं के परिवार की महिलाएं चुनाव लड़ रही हैं। मेयर सीट महिला आरक्षित है। इस कारण नेताओं को परिवार की महिलाओं को लड़ाना पड़ रहा है। कुछ ने अपने खास कार्यकर्ताओं को भी मौका दिया है। अब जो सीट जीतकर लाएगा और आगे की रणनीति में फिट बैठेगा उसे पार्टी मेयर का प्रत्याशी बनाएंगी। लेकिन सबसे अधिक वार्ड पार्षद की सीट पर निर्भर करेगा। जिस भी पार्टी की सीट ज्यादा आएगी। उसका मेयर बनने की संभावना ज्यादा रहेगी। हालांकि, सत्ताधारीपार्टी का पलड़ा भारी रहता है। जैसे पिछली बार कांग्रेस की सीट कम होते हुए मेयर बना लिया था।