बांसवाड़ा में कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर शुक्रवार रात पारंपरिक मटकी फोड़ प्रतियोगिता हुई। इस बार प्रतियोगिता शहर के कुशलबाग मैदान के बजाय भारत माता मैदान में रखी गई। इसे देखने के लिए हजारों की संख्या में शहरवासी पहुंचे। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की ओर से हुए इस आयोजन में युवाओं ने पिरामिड बनाकर मटकियां फोड़ीं। 18 मटकियां बांधी गईं प्रतियोगिता में कुल 18 मटकियां बांधी गई थीं। मैदान में 'गोविंदा आला रे' और 'हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की' के जयकारे लगते रहे। शहर की अलग-अलग व्यायामशालाओं के पहलवानों ने मटकी फोड़ने के लिए पिरामिड बनाए। युवाओं ने संतुलन और ताकत का इस्तेमाल करते हुए मटकी तक पहुंचने की कोशिश की। इन व्यायामशालाओं के पहलवान शामिल हुए प्रतियोगिता में भारत माता, मारुति, खोडियार माता, कालिका माता, वनेश्वर महादेव, पवनपुत्र, पंचमुखी और पांडव व्यायामशाला समेत शहर की प्रमुख व्यायामशालाओं और दूसरे अखाड़ों के पहलवानों को बुलाया गया था। मैदान में युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। मटकी तक पहुंचने के लिए हर टीम पूरी ताकत लगाती नजर आई। पहली मटकी आलोक वाल्मीकि ने फोड़ी प्रतियोगिता की पहली मटकी पवनपुत्र व्यायामशाला के आलोक वाल्मीकि ने फोड़ी। उन्होंने अच्छा संतुलन बनाते हुए मटकी तक पहुंचकर उसे फोड़ा। इसके बाद भारत माता व्यायामशाला के मोहनदास ने साथियों के साथ मिलकर दूसरी मटकी फोड़ी। खोडियार माता व्यायामशाला की टीम ने तीसरी मटकी फोड़ी। मटकी फूटने के साथ ही मैदान में तालियां और जयकारे गूंजने लगे। संत और कई अतिथि मौजूद रहे कार्यक्रम में संत रामस्वरूप महाराज, विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष मोहन पटेल, कार्यक्रम संयोजक प्रदुम्न सिंह, प्रांत संयोजक करण सिंह, संपर्क प्रमुख अजीत सिंह कोशिश, पूर्व मंत्री धनसिंह रावत और हकरू मईडा मौजूद रहे। इसके साथ ही विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कई कार्यकर्ता, बड़ी संख्या में महिलाएं और शहरवासी भी कार्यक्रम में पहुंचे। रात 11 बजे हुआ कार्यक्रम का समापन कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के लिए पुलिस जवान भी मैदान में मौजूद रहे। युवाओं के मटकी फोड़ने के साथ कई पहलवानों ने करतब भी दिखाए। कार्यक्रम रात 11 बजे खत्म हुआ। इसके बाद विजेता गोविंदा टीमों और पहलवानों को सम्मानित किया गया। इसी के साथ बांसवाड़ा में जन्माष्टमी का पर्व उत्साह के साथ संपन्न हुआ।