ब्यावर पुलिस ने क्रिप्टोकरेंसी और हवाला कारोबार से जुड़े साइबर ठगी के एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि इस गिरोह के तार विदेश में बैठे साइबर ठगों से जुड़े हैं। पुलिस ने बताया कि आरोपी ई-मित्र और पेट्रोल पंप संचालकों को अपना निशाना बनाते थे। वे ठगी की रकम इन संचालकों के खातों में डलवाते थे। फिर कमीशन काटकर बची हुई रकम नकद ले लेते थे। जब इन खातों में जमा रकम को लेकर साइबर ठगी की शिकायत आती थी, तो बैंक खाता होल्ड या बंद हो जाता था। इससे खाताधारकों को आर्थिक नुकसान के साथ कानूनी दिक्कतें भी होती थीं। इस गिरोह का खुलासा एक ई-मित्र संचालक की शिकायत के बाद हुआ। जवाजा पुलिस थाने में ई-मित्र संचालक तुलसा सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि 28 अगस्त को सारोठ चौराहा स्थित उनकी चौहान ई-मित्र दुकान पर काले रंग की थार गाड़ी से तीन युवक आए थे। इनमें से एक युवक रितिक को तुलसा सिंह का भतीजा यश जानता था। युवकों ने नकद पैसे लेने की बात कहकर ई-मित्र के लेनदेन में इस्तेमाल होने वाला क्यूआर कोड मांगा। कुछ देर बाद तुलसा सिंह के खाते में ज्योति कुमारी के नाम से 30 हजार रुपए जमा हुए। इसमें से 300 रुपए कमीशन काटकर 29,700 रुपए युवकों को नकद दे दिए गए। इसके बाद सुशीला के नाम से 50 हजार रुपए और जमा हुए, जिसमें से 500 रुपए कमीशन काटकर 49,500 रुपए नकद दिए गए। अगले दिन दिल्ली पुलिस की साइबर शाखा ने खाते को होल्ड कर दिया। बैंक से जानकारी लेने पर पता चला कि खाते में जमा रकम साइबर ठगी की थी। इस मामले में जवाजा पुलिस थाने में बीएनएस और आईटी एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पूछताछ में सामने आया क्रिप्टो और हवाला कनेक्शन
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी एक एप के माध्यम से विदेशों में बैठे अज्ञात साइबर ठगों के ग्रुप से जुड़े हुए थे। ये आरोपी नकद प्राप्त राशि से क्रिप्टोकरेंसी, विशेष रूप से यूएसडीटी खरीदते थे और डिजिटल माध्यम से विदेशों में बैठे साइबर ठगों को भेजते थे। पुलिस के अनुसार क्रिप्टोकरेंसी के लेनदेन पर आरोपियों को करीब 25 प्रतिशत अतिरिक्त राशि मिलने की बात भी सामने आई है। जांच में यह भी सामने आया कि विदेश से होने वाले हवाला कारोबार में क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया जाता था। आरोपी साइबर ठगी से प्राप्त नकदी को क्रिप्टो में परिवर्तित कर आगे भेजते थे। इस नेटवर्क के जरिए धन को हवाला कारोबार में खपाने का काम किया जाता था। ई-मित्र और पेट्रोल पंप बने निशाना
गिरोह के सदस्य ऐसे स्थानों की तलाश करते थे जहां डिजिटल लेनदेन के साथ नकदी उपलब्ध हो। ई-मित्र और पेट्रोल पंप संचालकों से क्यूआर कोड लेकर उनके खातों में फ्रॉड की राशि जमा करवाई जाती थी। इसके बाद कमीशन काटकर नकदी प्राप्त कर ली जाती थी। साइबर ठगी की शिकायत होने पर संबंधित खातों पर बैंकिंग कार्रवाई हो जाती थी। चार आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में राजवीर सिंह चौहान उर्फ रोहित (24) निवासी कोटड़ा, थाना जवाजा, हाल घुघरा घाटी अजमेर, रितिक मण्डोलिया (23) निवासी घुघरा घाटी अजमेर, त्रिलोक रेगर (23) निवासी घुघरा घाटी अजमेर और चिराग मुलचंदानी (26) निवासी चन्द्रवरदाई नगर अजमेर को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से पूछताछ जारी है और साइबर ठगी, क्रिप्टोकरेंसी और हवाला नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने की संभावना है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में कार्रवाई
कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ब्यावर डॉ. अनुकृति उज्जैनिया और वृत्ताधिकारी ब्यावर नरेंद्र पारीक के सुपरविजन में डीएसटी प्रभारी राजदीपेंद्र सिंह, जवाजा थाना अधिकारी डॉ. नवल किशोर और जिला ब्यावर साइबर सेल की टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया।