प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों में डीन, डायरेक्टर रिसर्च पदों पर नियुक्तियों को लेकर विवाद हो गया है। राज्यपाल के आदेशों और वरिष्ठता को प्राथमिकता देने के प्रावधान के बावजूद वरिष्ठ प्रोफेसरों को दरकिनार कर चहेते जूनियर अफसरों को इन पदों पर बैठा दिया गया है। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर के बाद कृषि विश्वविद्यालय (जोबनेर) और कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर की नियुक्तियां भी सवालों में हैं। तकनीकी कॉलेजों में संबंधित विषय के विशेषज्ञों के बजाय अन्य विषयों के शिक्षकों को डीन बनाया गया है। कुछ कॉलेजों में प्रोफसरों की जगह एसोसिएट या जूनियर प्रोफेसर को जिम्मेदारी दी गई। नियम...विश्वविद्यालय अधिनियम और कुलाधिपति के निर्देशों के अनुसार डीन एवं डायरेक्टर जैसे प्रशासनिक पदों पर वरिष्ठता, अनुभव और योग्यता तय है। तकनीकी कॉलेजों के लिए विषय की विशेषज्ञता आवश्यक है। ऐसे ही मामले में जोबनेर में पूर्व कुलपति को भी इसी वजह से बर्खास्त किया था। जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय: भास्कर की जांच में श्री करण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर की कई नियुक्तियों पर भी सवाल सामने आए हैं। कॉलेज ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी में डॉ. बी.एल. जाट को डीन बनाया । सवाल यह है कि क्या डेयरी टेक्नोलॉजी जैसे तकनीकी कॉलेज में संबंधित विषय के विशेषज्ञ को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी। डायरेक्टर रिसर्च पद पर डॉ. उम्मेद सिंह की नियुक्ति को लेकर दावा है कि उनसे वरिष्ठ प्रोफेसर उपलब्ध थे। डॉ. एस. पी. सिंह बागवानी (हॉर्टिकल्चर) विषय के प्रोफेसर हैं, फिर भी उन्हें विश्वविद्यालय का एस्टेट ऑफिसर नियुक्त किया गया है। एस्टेट ऑफिसर का दायित्व विश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों में नए भवनों के निर्माण, मरम्मत, रखरखाव तथा अन्य आधारभूत अवसंरचना संबंधी कार्यों का प्रबंधन करना होता है। यह पद मुख्यतः सिविल/निर्माण अभियंत्रण से संबंधित तकनीकी विशेषज्ञता की मांग करता है, क्योंकि इन कार्यों में लाखों-करोड़ों रुपये के निर्माण एवं विकास कार्यों की योजना, निगरानी और क्रियान्वयन शामिल होता है। उप संपदा अधिकारी: प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण इस पद पर भारी कनिष्ठता का परिचय देते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नवीन कुमार को जिम्मेदारी दी गई है, जो पदनाम और अनुभव दोनों में काफी जूनियर है। एस.के.एन. कृषि महाविद्यालय के डीन पद पर डॉ. डी.के. गोठवाल जूनियर होने के बाद पद दे दिया। जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय: जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय में भी तकनीकी कॉलेजों की नियुक्तियां चर्चा में हैं। कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में डॉ. मदन मोहन कुमावत को डीन बनाया । उनका विषय कीट विज्ञान है। सवाल यह है कि क्या कृषि अभियांत्रिकी कॉलेज के डीन के लिए कृषि अभियांत्रिकी की विशेषज्ञता के लि‍ए है। कॉलेज ऑफ डेयरी एंड फूड टेक्नोलॉजी में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नलिनी रमावत को डीन बनाया । उनकी विषय पृष्ठभूमि एग्रोनॉमी है। कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर, जोधपुर में डॉ. जे.आर. वर्मा की नियुक्ति पर भी वरिष्ठता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर, बायतू में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजू लाल भारद्वाज को डीन बनाए जाने पर भी आपत्ति है। एमपीयूएटी : इंटरव्यू में बदली पूरी तस्वीर राज. कृषि कॉलेज : छठे नंबर के प्रोफेसर दो कॉलेजों के डीन राजस्थान कृषि कॉलेज में डीन के लिए वरिष्ठता सूची में डॉ. आरपी. मीणा, डॉ. एनएल महावर, डॉ. एमके महला, डॉ. केके यादव और डॉ. आरएच मीणा पहले पांच स्थानों पर थे। सबसे वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. आरपी. मीणा का आवेदन निरस्त किया। इसके बाद छठे स्थान पर रहे डॉ. लोकेश गुप्ता को राजस्थान कृषि और डेयरी कॉलेज का डीन बना दिया। बाद में डेयरी कॉलेज का प्रभार छोड़ दिया। होम साइंस कॉलेज : वरिष्ठों की जगह दूसरों को जिम्मेदारी डॉ. राजश्री और डॉ. प्रकाश जैसे वरिष्ठ प्रोफेसरों के रहते डॉ. सरला लखावत को डीन बनाया। डॉ. सरला भाजपा नेता ओंकार सिंह लखावत की पुत्री हैं। इंजीनियरिंग कॉलेज: प्रो. डॉ. विक्रमादित्य दवे के बजाय डॉ. विनोद यादव डीन बने। भीलवाड़ा कृषि कॉलेज: डॉ. आरपी. मीणा, डॉ. केसी नागर और डॉ. सीएम यादव जैसे वरिष्ठ प्रोफेसरों के रहते डॉ. के.के. यादव को डीन बनाया। जो भी किया है, नियमों के अनुसार ही किया है। इसमें सीनियर भी देखे हैं और काबिलियत भी देखी है। किसी ने दो जगह फार्म भरा तो उस हिसाब से दो जगह सलेक्शन हो गया होगा। लेकिन एक जगह तो छोड़ना ही पड़ता है। -प्रो. प्रतापसिंह, कुलपति, MPUAT,उदयपुर इस बारे में वीसी ही बताएंगे। हम तो उम्मीदवार थे। पांच लोगों के इंटरव्यू हुए उस आधार पर सलेक्शन हुआ है। पिताजी के राजनीतिक होने से कोई फायदा नहीं मिला है, फायदा लेना होता तो वीसी ही बन जाते। -डॉ सरला लखावत, डीन, कॉलेज ऑफ होम साइंस,एमपीयूटी