नगर निगम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस सीधी टक्कर से पहले अपनों के बीच ही उलझ गई। 150 वार्डों में 953 निर्दलीय मैदान में हैं। इनमें 35 से ज्यादा वार्डों में भाजपा-कांग्रेस के टिकट से वंचित पूर्व पार्षद, संगठन पदाधिकारी और कार्यकर्ता हैं। ये अगर मैदान में रहे तो वोटों में बड़ी सेंध लगा सकते हैं। दोनों दलों ने डैमेज कंट्रोल शुरू कर दिया है। 3 सितंबर को नाम वापसी का अंतिम दिन है। यानी बागियों को मनाने के लिए 33 घंटे (गुरुवार दोपहर तीन बजे तक) बचे हैं। इसके लिए भाजपा ने अलग टीम बनाई है तो कांग्रेस ने स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। सूची में नाम, सिंबल नहीं मिला, टेलर बागी पप्पू को टिकट, पूर्व पार्षद बागी