फर्जी कंपनियां अजमेर, जयपुर, भीलवाड़ा, बीकानेर, मुंबई, कोलकाता, मप्र में रजिस्टर्ड चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) ने बिना जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के 40 फर्जी और शेल कंपनियों के जरिए करीब 2395.63 करोड़ रुपए विदेश भेजने के लिए फर्जी सर्टिफिकेट जारी कर दिए। आयकर विभाग की अन्वेषण शाखा की शिकायत पर पत्रकार कॉलोनी थाने में मानसरोवर निवासी सीए अभिषेक जैन के खिलाफ बीएनएस की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। जांच में सामने आया कि आरोपी ने वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2023-24 के दौरान 3168 फर्जी फॉर्म 15सीबी सर्टिफिकेट जारी किए। इनमें जरूरी दस्तावेजों और लेन-देन का सत्यापन नहीं किया गया। 3 वि​त्तीय वर्ष के दौरान फर्जी 15सीबी फॉर्म जारी करता रहा आयकर विभाग के उप निदेशक (अन्वेषण) मिंटू लाल मीणा की ओर से दर्ज कराई रिपोर्ट के अनुसार, 18 अगस्त को मानसरोवर स्थित सावित्री विहार एक्सटेंशन में सीए अभिषेक जैन के कार्यालय पर सर्वे किया गया। जांच में सामने आया कि वर्ष 2021 से 2024 के दौरान 40 फर्मों के नाम 3168 फॉर्म 15सीबी जारी किए गए। इन सर्टिफिकेट्स के आधार पर 2395 करोड़ रुपए से अधिक की राशि विदेश भेजी गई। 40 नामों में दो के जरिए 77.4% रकम विदेश भेजी जांच में सामने आया कि 40 नामों में सिर्फ रिंकू और संतोष शाक्य के नाम से 1856.39 करोड़ रुपए की रेमिटेंस हुई, जो कुल रेमिटेंस का 77.4 फीसदी है। दर्ज रिपोर्ट के अनुसार भूसावर, भरतपुर के रिंकू के नाम 878.86 करोड़ रुपए और श्योरपुर मप्र के संतोष शाक्य के नाम 977.53 करोड़ रुपए की रेमिटेंस दर्ज है। मोटी दलाली के लिए सीए ने बिना बिल देखे जारी किए सर्टिफिकेट आरबीआई और आयकर नियमों के अनुसार विदेश में रकम भेजने से पहले एग्रीमेंट, इनवॉयस, टैक्स डिडक्शन और कंपनियों की बुक्स ऑफ अकाउंट्स की जांच जरूरी है। आरोप है कि सीए ने मोटी दलाली के चक्कर में बिना बिल या रिकॉर्ड देखे 40 फर्जी और शेल कंपनियों को सर्टिफिकेट जारी कर दिए। सीए अभिषेक के खिलाफ धोखाधड़ी की धारा 318(4) बीएनएस समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है सिंडिकेट से जुड़े लोगों की तलाश की जा रही है। -राजर्षि राज, डीसीपी साउथ विदेश भेजी जाने वाली रकम पर सीए क्या जांचता है; समझें... फार्म 15CB आयकर नियमों के तहत चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा दिया जाने वाला टैक्स सर्टिफिकेट है। इसका इस्तेमाल तब होता है जब भारत से किसी अनिवासी व्यक्ति/विदेशी कंपनी को पैसा भेजा जा रहा हो और उस भुगतान पर भारत में टीडीएस काटने की स्थिति बनती हो। उदाहरण... मान लीजिए जयपुर की कोई कंपनी विदेश की कंपनी को ₹1 करोड़ भेजना चाहती है। बैंक पैसा विदेश भेजने से पहले यह देखेगा कि पैसा किसे भेजा जा रहा है? किस काम के लिए भेजा जा रहा है? इस भुगतान पर भारत में कितना टीडीएस बनता है? भारत और संबंधित देश के बीच डबल टैक्सेशन एवोडेंस एग्रीमेंट (डीटीएए) का क्या प्रावधान है। भुगतान पर कोई टैक्स काटना जरूरी है या नहीं। इन टैक्स पहलुओं की जांच करके सीए फॉर्म 15CB में प्रमाणित करता है। आरोपित रेमिटर्स ने इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर विदेश में बड़ी रकम भेजी। (जैसा सीए ब्रजेश सिंह व इनकम टैक्स में लॉ एक्सपर्ट अन्नू सोनी ने बताया)