चित्तौड़गढ़ जिले की विजयपुर रेंज के गोरसिया रिजर्व फॉरेस्ट में वन विभाग ने हाल ही में हुए अतिक्रमणों के खिलाफ अभियान चलाया। देवडुगरी और जवासिया गांव की आबादी से लगी वन भूमि पर कुछ लोगों ने नई झोंपड़ियां और बाड़े बनाकर अस्थायी कब्जा करना शुरू कर दिया था। इसकी जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे इलाके का दोबारा सर्वे किया। पुराने नोटिफाइड नक्शों और वन सीमा के स्थायी चिन्हों का मिलान कर यह तय किया गया कि वन भूमि की वास्तविक सीमा कहां तक है। जांच में जहां भी वन भूमि पर नए अस्थायी कब्जे मिले, उन्हें मौके पर ही हटाया गया। इसके साथ ही विभाग ने यह भी सुनिश्चित किया कि भविष्य में दोबारा कोई कब्जा नहीं हो सके। इसके लिए पूरी सीमा पर खाई (ट्रेंच) खुदवाई गई और जरूरत वाले स्थानों पर फेंसिंग का काम भी कराया गया। वन विभाग का कहना है कि आरक्षित वन की जमीन पर किसी भी तरह का नया कब्जा या निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में आगे भी इसी तरह तुरंत कार्रवाई की जाएगी। 1944 से आरक्षित है वन क्षेत्र, निगरानी जारी उप वन संरक्षक वी. केतन कुमार ने बताया कि गोरसिया वनखंड साल 1944 से आरक्षित वन घोषित है। यह करीब 1270 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी सुरक्षा के लिए 137 बाउंड्री पिलर लगाए गए हैं, जिनके आधार पर वन सीमा तय की गई है। विभाग का कहना है कि इतने बड़े आरक्षित वन क्षेत्र की सुरक्षा उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे में समय-समय पर सीमा का सर्वे और निरीक्षण किया जाता है, जिससे वन भूमि पर धीरे-धीरे होने वाले कब्जों को शुरुआत में ही रोका जा सके। सहायक वन संरक्षक भावना शर्मा की निगरानी में क्षेत्रीय वन अधिकारी भूपेंद्र सिंह शक्तावत, वनपाल मनोहर सिंह जाट तथा वनरक्षक मेघनाथ, नारायण सिंह, महेंद्र सिंह और योगेश गुर्जर ने मौके पर रहकर वन सीमा की निशानदेही कराई और ट्रेंच खुदवाने का काम पूरा कराया। वन विभाग ने कहा है कि वन भूमि पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा, निर्माण या सीमा से छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ आगे भी लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। विभाग का मानना है कि सीमा स्पष्ट रहने और नियमित निगरानी से वन संपदा को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी और भविष्य में अतिक्रमण की कोशिशों पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी।