जिले में यह पहला मौका है जब पर्यावरण संरक्षण के लिए एक सरकारी महकमे (राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल) ने सरकार के ही दूसरे उपक्रम (रीको लिमिटेड) के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है। करणी औद्योगिक क्षेत्र (विस्तार) में बिना वैध सम्मति (सीटीई/सीटीओ) और बिना सीईटीपी के अवैध रूप से हो रहे संचालन को लेकर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड बीकानेर के क्षेत्रीय अधिकारी ने विशिष्ट पीसीपीएनडीटी न्यायालय में रीको और उसके इकाई प्रभारी सुरेंद्र प्रसाद शर्मा के खिलाफ परिवाद पेश कर दिया है। यह परिवाद जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 25 व 26 के उल्लंघन तथा संशोधित अधिनियम 2024 की धारा 45(ई) के तहत दायर किया गया है। दरअसल एनजीटी के आदेश के बाद पॉल्यूशन बोर्ड के बीकानेर क्षेत्रीय कार्यालय ने रीको को 12 नवंबर 2025, 31 दिसंबर 2025 और 14 मार्च 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किए। बावजूद इसके रीको की ओर से न तो कोई संतोषजनक जवाब दिया गया और न ही नियमों की अनुपालना की गई। इसके बाद बीकानेर आरओ ने 30 मार्च 2026 को मुख्यालय जयपुर को अभियोजन की स्वीकृति का प्रस्ताव भेजा। मंडल मुख्यालय के सदस्य सचिव कपिल चंद्रावल ने 30 जून 2026 को पत्र जारी कर जल अधिनियम की धारा 45(ई) के तहत रीको बीकानेर के खिलाफ कोर्ट में परिवाद दाखिल करने की विधिवत मंजूरी दे दी, जिसकी पालना में बीकानेर कोर्ट में यह परिवाद दर्ज कराया गया है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी राजकुमार मीणा ने बताया कि मुख्यालय के आदेश पर रीको के खिलाफ परिवाद दर्ज कराया गया है। आगामी कार्यवाही कोर्ट के आदेशानुसार की जाएगी। भास्कर इनसाइट ऐसे खुलती गई लापरवाही की पोल