साइबर ठग अब पोर्नोग्राफिक ऐप्स के विज्ञापनों के जरिए मोबाइल में संदिग्ध एपीके इंस्टॉल करवाकर डिवाइस और निजी डेटा पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्मस पर पोर्नोग्राफिक विज्ञापन दिखाकर यूजर्स को फर्जी या अश्लील वेबसाइटों पर पहुंचाया जा रहा है। यहां से एपीके डाउनलोड करवाने के बाद ठग एक्सेसिबिलिटी समेत संवेदनशील परमिशन हासिल कर मोबाइल की गतिविधियों और डेटा तक पहुंच बना सकते हैं। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने इसे लेकर आमजन को सतर्क किया है और संदिग्ध लिंक से एपीके डाउनलोड नहीं करने की सलाह दी है। सोशल मीडिया विज्ञापनों से शुरू होता है खेल पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान ने बताया कि साइबर अपराधी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर्षक और अश्लील विज्ञापनों के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। विज्ञापन पर क्लिक करते ही यूजर को संदिग्ध वेबसाइट पर ले जाया जाता है, जहां उसे ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया जाता है। पहले एपीके, फिर परमिशन के नाम पर जाल संदिग्ध ऐप मोबाइल में इंस्टॉल होने के बाद अपराधी ‘ऐप अपडेट’ के नाम पर दूसरा पैकेज डाउनलोड करवा सकते हैं। इसके बाद ऐप एक्सेसिबिलिटी समेत कई महत्वपूर्ण परमिशन मांग सकता है। यूजर के अनुमति देते ही अपराधियों को मोबाइल में मौजूद डेटा और डिवाइस की गतिविधियों तक पहुंच मिलने का खतरा बढ़ जाता है। पुलिस के मुताबिक ऐसे ऐप बैकग्राउंड में सक्रिय रहकर यूजर की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं। यानी मोबाइल सामान्य रूप से काम करता हुआ दिखाई दे सकता है, लेकिन पीछे से संदिग्ध ऐप अपना काम करता रह सकता है। VPN के जरिए ट्रैफिक पर भी नजर पुलिस के अनुसार कुछ संदिग्ध ऐप मोबाइल में VPN भी इंस्टॉल कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में मोबाइल का इंटरनेट ट्रैफिक साइबर अपराधियों के सर्वर के जरिए जाने की आशंका रहती है। डिवाइस पर नियंत्रण हासिल करने के बाद ठग बैंक खातों और अन्य वित्तीय संसाधनों से रकम निकालने की कोशिश कर सकते हैं। कुछ संदिग्ध ऐप इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि उन्हें सामान्य तरीके से अनइंस्टॉल करना भी मुश्किल हो जाता है। ऐप डिलीट नहीं हो रहा तो सेफ मोड अपनाएं राजस्थान पुलिस ने बताया कि अगर संदिग्ध ऐप सामान्य तरीके से अनइंस्टॉल नहीं हो रहा है तो मोबाइल को ‘’सेफ मोड'' में शुरू किया जा सकता है। इसके बाद: सेटिंग > एप्स > संदिग्ध ऐप > अनइंस्टॉल ऐप हटाने के बाद फोन को सामान्य तरीके से रिस्टार्ट करने पर सेफ मोड हट जाएगा। इन गलतियों से बचें पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि— सोशल मीडिया विज्ञापनों या अज्ञात लिंक से एपीके डाउनलोड न करें। अनजान ऐप को कोई परमिशन न दें। ऐप केवल विश्वसनीय और आधिकारिक स्टोर से ही डाउनलोड करें। मोबाइल में इंस्टॉल ऐप्स की नियमित रूप से समीक्षा करें। गूगल प्ले प्रोटक्ट चालू रखें। मोबाइल का ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप्स अपडेट रखें। बैंक खाते और यूपीआई लेनदेन पर लगातार नजर रखें। ठगी होते ही 1930 पर करें कॉल अगर साइबर ठगी में पैसे चले गए हैं तो देरी किए बिना साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें। इसके अलावा साइबर हेल्पडेस्क के नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी सूचना दी जा सकती है। पुलिस के मुताबिक ठगी के बाद जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, रकम को रोकने या रिकवर करने की संभावना उतनी ही अधिक रहेगी।