दिल-दिमाग के इलाज में दूसरे राज्यों का SMS पर भरोसा, 3.5 साल में कुल 54 हजार भर्ती राजधानी में आईपीडी टावर और रिम्स जैसे बड़े चिकित्सा संस्थानों से जहां प्रदेश में मेडिकल टूरिज्म को पंख लगने वाले हैं, वहीं एसएमएस में भी राज्य के साथ देशभर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। एसएमएस में साढ़े 3 साल में अन्य राज्यों के 54 हजार से ज्यादा मरीज भर्ती हुए, वहीं 5.5 लाख मरीज ओपीडी में दिखाने आए हैं। जनरल मेडिसिन, न्यूरोसर्जरी, कार्डियोलॉजी, जनरल सर्जरी में सबसे ज्यादा मरीज आ रहे हैं। 2023 में दूसरे राज्यों के करीब 16 हजार मरीज भर्ती हुए थे। 2024 और 2025 में इनकी संख्या करीब 15-15 हजार रही है। 2026 में जुलाई तक ही करीब 8,500 मरीज अन्य राज्यों से आकर भर्ती हो चुके हैं। यानी हर महीने औसतन एक हजार से ज्यादा मरीज दूसरे राज्यों से एसएमएस पहुंच रहे हैं। वहीं विदेशी मरीजों की बात करें तो हर साल 100 से ज्यादा मरीज विदेशों से भी आ रहे हैं। मेडिसिन, न्यूरोसर्जरी और कार्डियोलॉजी में ज्यादा पहुंच रहे एसएमएस पर सिर्फ बाहरी राज्यों के मरीजों का दबाव नहीं बढ़ रहा, बल्कि राजस्थान के मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। अस्पताल की डेली ओपीडी करीब 10 हजार मरीज तक पहुंच चुकी है। दूसरे राज्यों से आने वाले मरीजों की बात करें तो सबसे ज्यादा संख्या जनरल मेडिसिन, न्यूरोसर्जरी, इमरजेंसी मेडिसिन और कार्डियोलॉजी विभागों में है। गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए मरीज राजस्थान के सरकारी अस्पताल में पहुंच रहे हैं। एसएमएस में रोजाना ओपीडी की संख्या ही 10 हजार पहुंच गई है। कार्डियोलॉजी, जनरल मेडिसिन से लेकर न्यूरोसर्जरी, जनरल सर्जरी में पड़ोसी राज्यों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। यह एसएमएस पर बढ़ रहे भरोसे को दर्शाता है। -डॉ. दीपक माहेश्वरी, प्रिंसिपल एसएमएस