हनुमानगढ़ के पल्लू क्षेत्र के गांव बरमसर में शुक्रवार को लोक देवता कंवर केसरो जी महाराज का विशाल दो दिवसीय मेला आस्था और श्रद्धा के बीच शुरू हुआ। भाद्रपद कृष्ण अष्टमी के अवसर पर आयोजित इस ऐतिहासिक मेले में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज के क्षेत्रों और सीमावर्ती राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु धोक देने पहुंचे। सितंबर की तेज गर्मी के बावजूद कई गांवों से भगत पैदल जात लेकर धाम पहुंचे। शनिवार शाम तक मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहने की संभावना है। गर्मी की परवाह नहीं, पैदल जात लेकर पहुंचे भगत सितंबर की तेज गर्मी भी श्रद्धालुओं की आस्था को नहीं डिगा सकी। आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में भगत पैदल जात लेकर कंवर केसरो जी महाराज के धाम पहुंचे। मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। श्रद्धालुओं ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं के लिए धोक लगाई। मेले में व्यवस्थाओं के लिए कमेटी और पुलिस मुस्तैद मेले को लेकर मंदिर कमेटी की ओर से पहले से ही व्यापक तैयारियां की गई थीं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पार्किंग, पेयजल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं। मंदिर कमेटी के सदस्य जवाहर लाल सिहाग ने बताया कि इस बार मेले के आयोजन को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। कमेटी की ओर से श्रद्धालुओं के लिए नि:शुल्क भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें सैकड़ों भक्तों ने भोजन एवं प्रसादी ग्रहण की। उन्होंने बताया कि पुलिस प्रशासन की ओर से भी मेले में पूरा सहयोग मिला। युवा साहित्यकार पवन सिहाग ‘अनाम’ ने बताया कि चोरी-चकारी जैसी छुटपुट घटनाओं को छोड़कर इस बार किसी बड़ी अव्यवस्था की स्थिति सामने नहीं आई। गांव के युवाओं और पुलिस प्रशासन ने मुस्तैदी से व्यवस्थाएं संभालीं। पार्किंग और जलपान समेत श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त इंतजाम रहे। दो दिन युवाओं ने संभाला व्यवस्थाओं का मोर्चा मेले को व्यवस्थित बनाए रखने में गांव के युवाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रह्लाद सिहाग, लालचंद गोस्वामी, हरिराम गोस्वामी, दौलतराम गोस्वामी, मोमन सिहाग, कृष्ण सिहाग, विनोद गोस्वामी, ओमप्रकाश शर्मा सहित अनेक युवाओं ने लगातार दो दिनों तक मेहनत करते हुए व्यवस्थाओं का मोर्चा संभाले रखा। प्राचीन है कंवर केसरो जी महाराज की आस्था की परंपरा बरमसर धाम में विराजमान लोक देवता कंवर केसरो जी महाराज की आस्था की परंपरा बेहद प्राचीन मानी जाती है। लोक मान्यताओं के अनुसार कंवर केसरो जी महाराज का संबंध जाहरपीर गोगा जी के परिवार से माना जाता है। गोगा जी की पीढ़ी से चली धार्मिक परंपरा चूरू, हनुमानगढ़ और बीकानेर से होते हुए राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों के साथ हरियाणा और पंजाब तक पहुंची है। सीमावर्ती राज्यों से भी हजारों श्रद्धालु यहां धोक देने आते हैं। बताया जाता है कि कभी धाम पर छोटा-सा कच्चा देवरा हुआ करता था, जो समय के साथ विकसित होकर आज भव्य एवं सुसज्जित मंदिर का रूप ले चुका है। मंदिर में पूजा-अर्चना की परंपरा स्वर्गीय भगत दुल्हराम के परिवार द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी निभाई जा रही है। धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक मिलन का भी केंद्र भाद्रपद में लगने वाला यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक मेल-मिलाप का भी बड़ा केंद्र है। गांव के लोगों के दूर-दराज से आए रिश्तेदार मेले में पहुंचते हैं। इससे पुराने रिश्ते मजबूत होते हैं और सामाजिक दायरा भी बढ़ता है। हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों में कंवर केसरो जी महाराज के प्रति श्रद्धा और सम्मान की मान्यताएं प्रचलित हैं। सर्पदंश, असाध्य बीमारी और विभिन्न मनोकामनाओं से जुड़ी लोक आस्थाओं के कारण भी श्रद्धालुओं का धाम के प्रति विश्वास लगातार बढ़ रहा है। कंवर केसरो जी महाराज से जुड़े चमत्कारिक किस्से आसपास के क्षेत्र में लोककथाओं के रूप में आज भी प्रचलित हैं। यही आस्था हर वर्ष मेले में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ का प्रमुख कारण मानी जाती है।