31 अगस्त : कजली तीज 2 सितंबर : चाना छठ व्रत 4 सितंबर : कृष्ण जन्माष्टमी 5 सितंबर : गोगा नवमी, 24 कोसीय परिक्रमण शुरू, शिक्षक दिवस 7 सितंबर : अजा एकादशी, सर्वार्थ सिद्धि योग 8 सितंबर : बिछबारस, प्रदोष व्रत, पर्युषण पर्व शुरू होगा 10 सितंबर : पितृ कार्य अमावस्या 11 सितंबर : राणी सती की वार्षिक पूजा, 24 कोसीय परिक्रमा का समापन 14 सितंबर : हरितालिका तीज, गणेश चतुर्थी 15 सितंबर : ऋषि पंचमी 19 सितंबर : राधा अष्टमी, दुर्गाष्टमी, दधीची जयंती 21 सितंबर : तेजा दशमी, रामदेवजी का मेला 22 सितंबर : जलझुलनी एकादशी 24 सितंबर : वामन जयंती, भुवनेश्वरी जयंती, प्रदोष व्रत 25 सितंबर : अनंत चतुर्दशी, गणेश विसर्जन 26 सितंबर : भाद्रपद पूर्णिमा व्रत, 16 दिवसीय श्राद्ध प्रारंभ भास्कर संवाददाता | झुंझुनूं हिंदी पंचांग का छठा महीना भाद्रपद शनिवार से शुरू हो गया। छठी तिथि के टूटने से इसका समापन 26 सितंबर को होगा। कृष्ण जन्माष्टमी के साथ काजली तीज, जैन समाज का पर्युषण पर्व, राणी सती मंदिर की वार्षिक पूजा, गणेश चतुर्थी, राधा अष्टमी, अनंत चतुर्दशी सहित कई बड़े तीज-त्योहार मनाए जाएंगे। पांच सितंबर को गोगा नवमी के साथ तीर्थराज लोहार्गल की सात दिवसीय 24 कोसीय परिक्रमा शुरू होगी। पंडित रोहित पुजारी ने बताया कि भाद्रपद में घर पर लड्डू गोपाल की स्थापना, शंख की स्थापना, श्रीमद् भागवत गीता का पाठ करने से धन, यश, वैभव की प्राप्ति होती है। भाद्रपद अमावस्या को कुशोत्पाटनी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन राणी सती मंदिर की वार्षिक पूजा रहेगी। इस दिन तोड़ी गई कुशा डाब पूरे एक साल काम आती है। उन्होंने बताया कि जन्माष्टमी के दिन गोपाल मंत्र का जाप करने, हरिवंश पुराण का पाठ करने या सुनने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। शास्त्रों की मान्यता के अनुसार भाद्रपद के दौरान भगवान श्रीकृष्ण, विष्णु, गणेश, भोलेनाथ, माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार भादो में सूर्य का सिंह राशि में प्रवेश होता है। कजरी तीज कल, दोपहर 11:56 से 12:47 बजे तक रहेगा अभिजीत मुहूर्त : कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाने वाली कजरी तीज इस बार 31 अगस्त को मनाई जाएगी। इसे कजली तीज, बड़ी तीज, सातूड़ी तीज भी कहते हैं। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य, परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से यह व्रत रखती हैं। अविवाहित कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से व्रत करती हैं। पंडित वेदप्रकाश महमिया ने बताया कि तृतीया तिथि रविवार को सुबह 9:36 बजे शुरू होकर 31 को सुबह 8:50 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि में तीज होने के कारण व्रत सोमवार को रखा जाएगा। इस दिन शिव-पार्वती की आराधना होती है। सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है। कथा सुनने की परंपरा है। पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक रहेगा। प्रदोष काल में भी पूजा हो सकती है।