झुंझुनूं नगर परिषद चुनाव में इस बार वार्डों के साथ टिकटों की गोपनीय रणनीति भी चर्चा में है। भाजपा और कांग्रेस ने अधिकांश वार्डों में अपने प्रत्याशी लगभग तय कर लिए हैं, लेकिन दोनों दल अधिकृत सूची सार्वजनिक करने से बच रहे हैं। चयनित दावेदारों को फोन के जरिए टिकट की सूचना दी जा रही है और पार्टी चुनाव चिन्ह अंतिम समय में एसडीएम कार्यालय में जमा कराने की तैयारी है। 31 अगस्त नामांकन की अंतिम तिथि है। ऐसे में दोनों दल आखिरी समय तक टिकटों को गोपनीय रखकर बगावत और निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या सीमित करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में दिनभर चर्चा रही कि किस वार्ड में किसे फोन आया और किसका टिकट कट गया, लेकिन अधिकृत सूची सार्वजनिक नहीं हुई। टिकट से ज्यादा सीक्रेसी पर जोर झुंझुनूं नगर परिषद के 60 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के टिकट के लिए एक-एक वार्ड से कई दावेदार मैदान में थे। दोनों दलों को आशंका है कि सूची पहले सार्वजनिक होने पर टिकट से वंचित नेता समर्थकों के साथ निर्दलीय नामांकन दाखिल कर सकते हैं। इसी वजह से प्रत्याशी चयन के बावजूद सूची सार्वजनिक नहीं की जा रही। सूत्रों के अनुसार चयनित प्रत्याशियों को व्यक्तिगत रूप से फोन कर बुलाया जा रहा है। उन्हें समय पर नामांकन दाखिल करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। पार्टी सिंबल भी अंतिम समय में उपलब्ध कराने की तैयारी है। बगावत रोकने के लिए रणनीति झुंझुनूं नगर परिषद के चुनावों में पहले भी बागी और निर्दलीय उम्मीदवार कई वार्डों में मुकाबले को प्रभावित करते रहे हैं। ऐसे में दोनों प्रमुख दल इस बार टिकट वितरण के बाद होने वाले असंतोष को नियंत्रित करने पर जोर दे रहे हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार टिकट की घोषणा और नामांकन के बीच समय कम रखने से नाराज दावेदारों को संगठन के खिलाफ चुनावी तैयारी करने का कम मौका मिलेगा। फोन पर टिकट, सीधे नामांकन भाजपा और कांग्रेस की ओर से चयनित प्रत्याशियों को व्यक्तिगत रूप से सूचना देने की रणनीति अपनाई गई है। पार्टी सूची को सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंचों पर जारी करने से भी बच रही है। कई मामलों में पार्टी फोन पर या सिंबल सीधे एसडीएम कार्यालय पहुंचाने की तैयारी है, ताकि अंतिम समय तक अधिकृत प्रत्याशी की जानकारी सार्वजनिक न हो। नाराज दावेदारों को मनाने की कोशिश टिकट वितरण के साथ दोनों दलों में डैमेज कंट्रोल भी चल रहा है। जिन वार्डों में टिकट को लेकर असंतोष की आशंका है, वहां वरिष्ठ नेताओं को नाराज दावेदारों से बातचीत की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें संगठन में सम्मानजनक भूमिका और भविष्य में अवसर का भरोसा देकर चुनाव मैदान से दूर रखने की कोशिश की जा रही है। 31 अगस्त को साफ होगी तस्वीर नामांकन की अंतिम तिथि 31 अगस्त होने के कारण अब टिकटों को लेकर सबसे ज्यादा हलचल अंतिम समय में देखने को मिलेगी। किस वार्ड में किसे पार्टी का टिकट मिलता है और कौन निर्दलीय मैदान में उतरता है, इसकी तस्वीर नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद साफ होगी।