बरसात कम भरने से तालाब में पानी का ठहराव आ गया। तेज धूप निकलने पर पानी के ऊपर बिना फूल, पत्ती या जड़ वाले सूक्ष्म जलीय पौधे पनपने लगते हैं। बारिश के पानी के साथ पहाड़ों से बहकर आने वाला कचरा और जैविक कचरे से मिलने वाले पोषक तत्व इसके तेजी से फैलने का मुख्य कारण हैं। समय के साथ पानी की ऊपरी सतह पर काई की मोटी परत जम जाती है। इससे सूरज की रोशनी और ऑक्सीजन पानी के अंदर नहीं जा पाती। पानी दूषित होने लगता है। मानसून के इस सीजन में अब तक केवल 404 एमएम बारिश हुई है। यह पिछले साल की तुलना में 109 एमएम कम है। कम बरसात के कारण तालाब करीब 16 फीट तक ही भरा है। अभी भी इसमें 6 फीट भराव कम है। झुंझुनूं | पहली नजर में देखने पर यह तस्वीर पहाड़ों के बीच किसी फुटबॉल मैदान पर उगी हरी घास सी नजर आती है। लेकिन असलियत में यह तालाब के पानी पर जमी काई है। कान्हा पहाड़ की तलहटी में बाबा शंकरदास आश्रम के पास समस तालाब स्थित है। इसमें जमा पानी की सतह पर हरे रंग की काई की परत जम चुकी है। भराव क्षमता करीब 22 फीट है। फोटो : ओमप्रकाश