राजस्थान में कृषि विभाग के कार्मिकों ने लंबित पदोन्नति और ऑनलाइन कार्यों के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं कराने समेत विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। कृषि पर्यवेक्षक संयुक्त समन्वय समिति राजस्थान के प्रदेशव्यापी आह्वान पर जिले के कृषि कार्मिकों ने बुधवार को जिला कलेक्टर, उपखंड अधिकारियों और तहसीलदारों को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए कार्मिकों ने अपनी मांगों से अवगत कराने के साथ आंदोलन के आगामी चरणों की जानकारी भी दी। जिला मुख्यालय पर संगठन के प्रदेश प्रवक्ता दिनेश तक्षक, जिलाध्यक्ष मनोज खेरिया और महामंत्री प्रमोद यादव के नेतृत्व में कृषि कार्मिकों ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। वहीं जिले के अलग-अलग उपखंडों में सहायक कृषि अधिकारियों के नेतृत्व में कार्मिकों ने संबंधित उपखंड अधिकारियों और तहसीलदारों को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिए। दो साल से अटकी पदोन्नति से नाराज कृषि कार्मिक कृषि कार्मिकों का कहना है कि राजकीय सेवा अवधि के दौरान उन्हें पदोन्नति का लगभग एक ही अवसर मिलता है, लेकिन यह प्रक्रिया पिछले दो वर्षों से लंबित है। संगठन के मुताबिक पदोन्नति समेत अन्य मांगों को लेकर कृषि आयुक्त के साथ कई बार वार्ता की जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। निजी मोबाइल और इंटरनेट से कर रहे विभागीय काम कार्मिकों ने ऑनलाइन कार्यों को लेकर भी अपनी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि कृषि विभाग की लगभग सभी योजनाएं ऑनलाइन संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा विभागीय स्तर पर कई अन्य कार्य भी ऑनलाइन ही कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद कर्मचारियों को ऑनलाइन काम के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। ऐसे में कृषि कार्मिक अपने निजी मोबाइल, इंटरनेट और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल कर विभागीय कार्यों को पूरा करने के लिए मजबूर हैं। संगठन का कहना है कि इससे कर्मचारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। 1 सितंबर से आंदोलन का पहला चरण शुरू कृषि पर्यवेक्षक संयुक्त समन्वय समिति ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। आंदोलन के पहले चरण की शुरुआत 1 सितंबर से कर दी गई है। इसके तहत कृषि कार्मिकों ने राजकीय व्हाट्सएप ग्रुप से लेफ्ट होने के साथ उद्यान विभाग के अतिरिक्त कार्यों और फार्मर रजिस्ट्री कैंपों का बहिष्कार शुरू किया है। 8 सितंबर से ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार आंदोलन के दूसरे चरण में 8 सितंबर से सभी ऑनलाइन कार्यों के साथ ऑनलाइन फसल कटाई प्रयोग का भी बहिष्कार किया जाएगा। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि इसके बाद भी विभाग की ओर से मांगों का उचित समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठन की ओर से आगामी चरणों की घोषणा भी की जाएगी। प्रदेशव्यापी आंदोलन के जरिए कृषि कार्मिक लंबित पदोन्नति और कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने सहित अपनी विभिन्न मांगों पर सरकार और विभाग का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। प्रदेश प्रवक्ता दिनेश तक्षक ने कहा कि कृषि कार्मिक लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं। कई बार वार्ता के बावजूद मांगों का समाधान नहीं होने के कारण अब आंदोलन का रास्ता अपनाना मजबूरी बन गया है।