जन्माष्टमी की रात मेवाड़ के कृष्णधाम श्री सांवलियाजी मंदिर में ऐसा माहौल बना, जिसे देखने वाले श्रद्धालु लंबे समय तक याद रखेंगे। रात ठीक 12 बजे जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का समय हुआ, मंदिर में विशेष आरती शुरू हुई और पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा। हजारों श्रद्धालुओं ने एक साथ "जय सांवरा सेठ" और "हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की" के जयघोष लगाए। इसके कुछ ही देर बाद हुई रंग-बिरंगी आतिशबाजी ने पूरे आसमान को रोशनी से भर दिया। मंदिर परिसर में मौजूद हर श्रद्धालु इस पल का हिस्सा बनना चाहता था। किसी के हाथ जुड़े हुए थे तो कोई अपने मोबाइल में इस खास नजारे को कैद कर रहा था। आधी रात का यह जन्मोत्सव श्रद्धा, उत्साह और भक्ति का ऐसा संगम बना, जिसमें दूर-दूर से आए श्रद्धालु पूरी तरह डूबे नजर आए। आतिशबाजी और जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर विशेष आरती के बाद मंदिर परिसर में शानदार आतिशबाजी की गई। आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी फैलते ही श्रद्धालुओं का उत्साह और बढ़ गया। चारों तरफ जयकारों की गूंज सुनाई देती रही और पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। मंदिर में मौजूद हर उम्र के लोग इस पल का आनंद लेते दिखाई दिए। जन्मोत्सव के बाद श्रद्धालुओं को पंजीरी और मक्खन का प्रसाद वितरित किया गया। प्रसाद लेने के लिए भक्त व्यवस्थित तरीके से कतार में लगे रहे। देर रात तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। मंदिर मंडल की ओर से की गई व्यवस्थाओं के कारण बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं को दर्शन और प्रसाद लेने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। 3D प्रोजेक्शन में दिखी सांवरा सेठ की कथा इस बार मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए 3D प्रोजेक्शन मैपिंग भी खास आकर्षण का केंद्र रही। मंदिर पहुंचे लोगों ने सांवरा सेठ से जुड़ी कथाओं और प्रसंगों को आधुनिक तकनीक के जरिए मंदिर की दीवारों पर देखा। शाम से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में रुककर इस प्रस्तुति का इंतजार करते रहे। जैसे ही प्रोजेक्शन शुरू हुआ, लोग मंत्रमुग्ध होकर उसे देखते रहे। कई श्रद्धालुओं ने अपने मोबाइल से इसकी फोटो और वीडियो भी बनाई। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर किसी में इसे देखने का उत्साह नजर आया। धार्मिक आस्था और आधुनिक तकनीक का यह मेल लोगों को काफी पसंद आया। रोशनी से सजा मंदिर, कई राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु जन्माष्टमी पर मंदिर को आकर्षक रोशनी से सजाया गया था। मुख्य मंदिर, परिसर और आसपास के हिस्सों में की गई लाइटिंग रात के समय बेहद सुंदर दिखाई दे रही थी। रोशनी के बीच मंदिर का पूरा परिसर अलग ही आभा बिखेर रहा था और श्रद्धालु बार-बार रुककर तस्वीरें खिंचवा रहे थे। इस आयोजन में केवल चित्तौड़गढ़ ही नहीं बल्कि राजस्थान के विभिन्न जिलों के अलावा महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। देर रात तक मंदिर परिसर भक्तों से भरा रहा और हर तरफ भक्ति, उत्साह और उल्लास का माहौल दिखाई दिया। जन्माष्टमी का यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए सिर्फ धार्मिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा अनुभव बन गया जिसे वे अपने साथ यादों के रूप में लेकर लौटे।