राजसमंद जिले में जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। जिले के पुष्टिमार्गीय मंदिरों के साथ चारभुजा और सेवंत्री में भी विशेष कार्यक्रम हुए। नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर में सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पूरे दिन मंदिर में श्रीकृष्ण के जयकारे गूंजते रहे। पंचामृत अभिषेक से शुरू हुआ जन्मोत्सव पुष्टिमार्ग की प्रधान पीठ श्रीनाथजी मंदिर में जन्माष्टमी के दिन उत्सव की शुरुआत मंगला झांकी में पंचामृत अभिषेक से हुई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने श्रृंगार झांकी, राजभोग झांकी और भोग आरती के दर्शन किए। दिनभर मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। श्रीकृष्ण के जयकारों से मंदिर और आसपास का माहौल भक्तिमय बना रहा। रिसाला चौक से निकली कृष्ण लीलाओं की झांकियां शाम को नगर के रिसाला चौक से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित झांकियों की शोभायात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और श्रद्धालु शामिल हुए। श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए शोभायात्रा के साथ चलते रहे। शोभायात्रा में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनकी लीलाओं से जुड़ी आकर्षक झांकियां शामिल थीं। रात 12 बजे 21 तोपों से सलामी शोभायात्रा के बाद रात 9:30 बजे जागरण के दर्शन खुले। ये दर्शन करीब रात 11:30 बजे तक चले। इसके बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। रात 12 बजे जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, मंदिर से बिगुल बजाया गया। इसके साथ ही रिसाला चौक में रखी दो तोपों से 21 बार सलामी दी गई। तोपों की आवाज इतनी तेज होती है कि आसपास के गांवों तक सुनाई देती है। इससे ग्रामीण इलाकों में भी कान्हा के जन्म की सूचना और बधाई का संदेश पहुंचता है। 350 साल पुरानी है तोपों से सलामी की परंपरा श्रीनाथजी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय तोपों से सलामी देने की परंपरा करीब 350 साल पुरानी है। इस खास परंपरा को देखने और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का साक्षी बनने के लिए देश-दुनिया से श्रद्धालु नाथद्वारा पहुंचते हैं। आज नंदोत्सव में केसर वाला दूध-दही छिड़का जा रहा जन्माष्टमी के अगले दिन शनिवार को श्रीनाथजी मंदिर में नंदोत्सव मनाया जा रहा है। मंदिर के सेवाकर्मियों के साथ तिलकायत परिवार के लोग केसर वाला दूध और दही छिड़ककर नंदोत्सव की परंपरा निभा रहे हैं। मंदिर परिसर में उत्सव का माहौल बना हुआ है। श्रद्धालु नंदोत्सव के इस खास आयोजन का आनंद ले रहे हैं।