सरकार बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान की बात करती है, लेकिन राजधानी के सवाई मानसिंह अस्पताल परिसर स्थित राजकीय कॉलेज ऑफ नर्सिंग का छात्रावास इन दावों पर सवाल खड़े कर रहा है। करीब 30 साल पुराने इस हॉस्टल में जीएनएम, बीएससी नर्सिंग, पोस्ट बेसिक और एमएससी नर्सिंग की करीब 200 छात्राएं रह रही हैं। हॉस्टल के कमरों से लेकर मैस तक दीवारों में जगह-जगह दरारें आई हुई हैं। प्लास्टर भी गिर रहा है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकता रहता है। कई जगह छत से चूना भी गिरने की स्थिति में है। हालत यह है कि भवन की दीवारों में पेड़-पौधे तक उग आए हैं। टॉयलेट में गंदगी और दुर्गंध की समस्या है। हॉस्टल के पीछे कचरे का ढेर लगा है, जहां जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता है। छात्राओं का कहना है कि तेज बारिश या हवा के दौरान जर्जर भवन के कारण हादसे का भय बना रहता है। तत्काल जरूरत; फिर भी 1.64 लाख का काम 6 माह से लंबित हॉस्टल की मरम्मत के लिए करीब 1.64 लाख रुपए का टेंडर पिछले छह महीने से लंबित है। ऐसे में सवाल है कि क्या किसी हादसे के बाद ही जिम्मेदारों की नींद खुलेगी? जर्जर हिस्सों को देखते हुए सुरक्षा ऑडिट, भवन का तकनीकी निरीक्षण और तत्काल मरम्मत की जरूरत है। कोरोना महामारी और शहर में हुए बड़े हादसों के दौरान नर्सिंग स्टाफ ने मरीजों की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेकिन जिन बेटियों से मरीजों की जिंदगी बचाने की उम्मीद की जाती है, उनकी अपनी सुरक्षा को लेकर व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि मामले की जानकारी दी गई है। संबंधित अधिकारियों को मौके पर जाकर बेटियों की सुरक्षा के इंतजाम करने चाहिए।