कांस्टेबल से लेकर एसपी तक को दी जाएगी ट्रेनिंग बच्चों और युवाओं को नशे की लत छुड़ाने के लिए चल रहे नशामुक्त भारत अभियान के तहत बड़ी पहल हुई है। नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू) के जयपुर कैंपस में एंटी नारकोटिक्स ट्रेनिंग सेंटर बनेगा। तीन माह में सेंटर ​का काम शुरू हो जाएगा। इसके लिए साइकोलॉजिकल काउंसलर भी नियुक्त किया गया है। सेंटर में डिजाइनर ड्रग्स केसों पर स्पेशल रिसर्च होगा। कांस्टेबल से लेकर एसपी तक के अफसरों को ट्रेनिंग दी जाएगी। सालभर में एक हजार पुलिसकर्मियों को ट्रेंड करेंगे। राजस्थान कैंपस हैड शंकर जुनारे ने बताया कि एनएफएसयू के गांधीनगर हैडक्वार्टर पर देशभर की मेट्रो सिटी से डिजायनर ड्रग्स के केसेज इन्वेस्टिेगेशन के लिए आ रहे हैं। ज्यादातर केस दिल्ली, अरुणाचल, गुजरात, त्रिपुरा, मिजोरम सहित कई प्रदेशों के हैं। यह ड्रग्स चॉकलेट, बिस्किट, टॉफी, चाय सहित अन्य खाद्य और पेय पदार्थों में इस्तेमाल किया जाता है। जयपुर सेंटर पुलिस इन्वेस्टिगेशन में भी मददगार बनेगा। एनसीबी-सीआरसीएल के साथ मिलकर काम करेगा। क्या हैं डिजाइनर ड्रग्स केस?: चॉकलेट, टॉफी, ब्राउनी, बिस्किट, टॉफी, गमी बीयर्स, चायपत्ती, हुक्का फ्लेवर में ड्रग्स मिलाकर दिया जाता है। इनकी कीमत 500-2000 रुपए होती है। एनएफएसयू सेंटर इनके लिए सस्ती, स्वदेशी और कोर्ट में मान्य टेस्टिंग किट बनाएगा। जीआईएस मैपिंग से ड्रग्स का सोर्स भी ट्रेस होगा। …फोरेंसिक साइकोलॉजी मैथड पर ट्रेनिंग का मॉड्यूल काउंसलर नशे की लत वाले युवाओं की काउंसलिंग करेगा। जयपुर कैंपस में हेल्प डेस्क बनेगी। पुलिस के लिए इन्वेस्टिगेटिव और फोरेंसिक साइकोलॉजी मैथड पर ट्रेनिंग मॉड्यूल बनेगा। पूछताछ तकनीक, क्रिमिनल प्रोफाइलिंग में मदद मिलेगी। राजस्थान पुलिस को ट्रेनिंग के लिए गांधीनगर नहीं जाना पड़ेगा।