राजस्थान के निकाय चुनावों में महिलाओं की राजनीतिक हिस्सेदारी 33 फीसदी से ऊपर रही, लेकिन आधी हिस्सेदारी सिर्फ 2009 में हासिल हुई। जयपुर में 2005-06 के चुनाव में 37.39 फीसदी महिलाएं जीती थीं। 2009 में यह आंकड़ा बढ़कर 50.65 फीसदी हो गया। इसके बाद 2014 में घटकर 36.26 और 2020 में करीब 36 फीसदी रह गया। प्रदेश में भी 2009 में महिलाओं की हिस्सेदारी 49.44 फीसदी तक पहुंची, लेकिन 2014 में घटकर 36.79 फीसदी रह गई। 2020 में 91 निकायों के 3,060 निर्वाचित पार्षदों में 1,172 यानी 38.30 फीसदी महिलाएं थीं। इसी दौरान छह नए नगर निगमों के 560 वार्डों में 205 यानी 36.61 फीसदी महिलाएं जीतीं। आंकड़े बताते हैं कि आरक्षण के बावजूद महिलाओं की हिस्सेदारी 50 फीसदी तक स्थायी रूप से नहीं पहुंच सकी। जयपुर में 4 साल का औसत 40.08% 2005-06 में 230 में से 86 (37.39%) सीटें जीतने वाली महिलाओं ने 2009 में 77 में से 39 (50.65%) सीटें जीतकर रिकॉर्ड बनाया। 2014 में यह भागीदारी 91 में से 33 (36.26%) सीटों पर सिमटी, जबकि 2020 में 250 में से 90 (36%) सीटों पर महिला प्रत्याशी विजयी रहीं। प्रदेश में औसत हिस्सेदारी 40.38% रही प्रदेश में 2005-06 के चुनाव में महिला विजेताओं की हिस्सेदारी 38.68% रही, जो 2009 में उछलकर रिकॉर्ड 49.44% पर पहुंची। इसके बाद 2014 में यह गिरकर 36.79% और 2020 में 36.61% पर सिमट गई। 2020 में छह निगम के चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को पीछे छोड़ा; 560 सीटों पर कांग्रेस ने 218 महिलाओं यानी 38.93% को मैदान में उतारा, भाजपा ने 199 यानी 35.54% को।