धोरीमन्ना का ब्लॉक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय इस समय आकंठ भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है। यहां अधिकारियों की शह पर संविदा कर्मी और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी खुलेआम दलाली कर रहे हैं। फील्ड में दिन-रात काम करने वाली एएनएम, आशा और अन्य कार्मिकों को उनकी खून-पसीने की तनख्वाह, एसीपी, पीएल भुगतान, क्लेम फॉर्म, वर्दी भत्ता, एसीआर और छुट्टियों के लिए भी रोज प्रताड़ित किया जा रहा है। कार्यालय का नियम साफ है कि जिसने तय रेट अनुसार रिश्वत दे दी, उसकी फाइल तुरंत पास, जिसने मना किया, उसका काम पेंडिंग। भास्कर पड़ताल में सामने आया है कि इस दलाली नेटवर्क को चलाने के लिए ऑफिस में तैनात 108 एम्बुलेंस का पायलट कृष्ण विश्नोई और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी किशोर मुख्य दलाल के रूप में सक्रिय हैं। यह पूरा खेल बीसीएमएचओ डॉ. रामजीवन विश्नोई की शह पर चल रहा है। धोरीमन्ना बीसीएमएचओ कार्यालय बना भ्रष्टाचार का अड्डा एएनएम ने रोते हुए बयां किया दर्द, कहा: बिना रुपये एक भी काम नहीं होता भास्कर ने क्षेत्र की 13 पीड़ित एएनएम से सीधी बात की। सभी ने ऑन-रिकॉर्ड पुष्टि की कि बिना रिश्वत दिए यहां पत्ता भी नहीं हिलता। कुछ सेंटर्स की एएनएम ने जब रुपये देने से मना किया, तो उनकी एसीपी रोक कर रखी गई है। पीड़ित महिलाओं ने रोते हुए बताया कि उन्हें इस कदर प्रताड़ित किया जाता है कि वे बयां भी नहीं कर सकतीं। दलालों की बात नहीं मानने की वजह से एसीपी रोक दी, वर्दी भत्ता, पीएल की राशि पास नहीं की। बार बार भरी हुई एसीआर लौटा दी जाती हैं। तनख्वाह के रुपए काट दिए जाते हैं। हमारी सीएल हम ले नहीं सकते। हमारे सेक्टर के एमओ के पास कोई अधिकार नहीं रहने दिया। ऐसे में हम सब बहुत ही परेशान और प्रताड़ित हैं। पूर्व में एक एएनएम ने 108 पायलट के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा भी दर्ज कराया था, लेकिन सांठगांठ के चलते कार्रवाई शून्य रही। दलालों ने तय कर रखी है प्रत्येक काम की रेट दलालों के माध्यम से दफ्तर में बकायदा एक रेट कार्ड फिक्स किया हुआ है। पहले एसीपी लगाने के नाम पर 5 हजार रुपये वसूले जाते थे, लेकिन जैसे ही यह क्षेत्र नए बालोतरा जिले के अधीन आया, दलालों ने अपनी रेट बढ़ाकर सीधे 15 हजार रुपये कर दी। इसके अलावा पीएल भुगतान के लिए 1 हजार रुपये फिक्स हैं। छोटे से लेकर बड़े बिल पास करवाने का कमीशन भी अलग से तय है। मंत्री के सामने खुली पोल, 1 महीने से जांच अटकी पिछले दिनों राज्य सरकार के मंत्री के.के. विश्नोई की जनसुनवाई में 15 से अधिक पीड़ित एएनएम ने एक सुर में बीसीएमएचओ के भ्रष्टाचार की पोल खोली थी। इसके बाद मामले की जांच संयुक्त निदेशक जोधपुर को सौंपी गई। जॉइंट डायरेक्टर ने धोरीमन्ना आकर शिकायतकर्ताओं के बयान भी दर्ज किए और 7 दिन में समाधान का भरोसा दिया था। मगर, आज एक महीना बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस है। न तो दोषियों पर कार्रवाई हुई और न ही पीड़ित एएनएम को राहत मिली। कार्मिकों के बयान दर्ज किए, जांच अभी प्रोसेस में है धोरीमन्ना बीसीएमएचओ कार्यालय में शिकायत के बाद हमने मौके पर जाकर जांच की थी और सभी संबंधित कार्मिकों के बयान दर्ज किए हैं। आगे की विभागीय कार्रवाई अभी प्रोसेस में है। जांच पूरी तरह मुकम्मल होते ही नियमानुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे। - डॉ. नरेंद्र कुमार सक्सेना, जॉइंट डायरेक्टर, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग जोधपुर