जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर किसी भी संभावित विमान अपहरण (एयरक्राफ्ट हाईजैक) जैसी आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने एंटी-हाइजैक मॉक ड्रिल का आयोजन किया। एयरक्राफ्ट हाईजैक की एक काल्पनिक स्थिति तैयार की गई और सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित प्रतिक्रिया, आपसी समन्वय, संचार व्यवस्था और संकट प्रबंधन प्रणाली को वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप परखा गया। जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़े अधिकारियों ने बताया- मॉक ड्रिल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि भविष्य में कभी एयरक्राफ्ट हाईजैक जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न होने पर एयरपोर्ट पर तैनात सभी सुरक्षा एजेंसियां तय मानकों और निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार त्वरित व प्रभावी कार्रवाई कर सकें। अभ्यास के दौरान अलग-अलग चरणों में सुरक्षा अलर्ट जारी करने, सूचनाओं के आदान-प्रदान, यात्रियों की सुरक्षा, एयरपोर्ट संचालन और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की कार्यक्षमता का विश्लेषण (एनालिसिस) किया गया। अधिकारियों ने बताया- ड्रिल के दौरान सीआईएसएफ (CISF) के अधिकारियों और जवानों ने अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए संकट की स्थिति में त्वरित निर्णय लेने और प्रभावी कार्रवाई की क्षमता का प्रदर्शन किया। इस दौरान सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों का पालन करते हुए काल्पनिक घटनाक्रम के अनुसार पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल सुरक्षा व्यवस्था का परीक्षण करना नहीं होता, बल्कि अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना और किसी भी आपात स्थिति में रिस्पॉन्स टाइम (प्रतिक्रिया समय) को और कम करना भी होता है। ऐसे अभ्यासों से सुरक्षा बलों को संभावित चुनौतियों का आकलन करने और आवश्यक सुधार लागू करने का मौका मिलता है। सीआईएसएफ ने बताया - इस अभ्यास के दौरान संचार प्रणाली, कमांड एंड कंट्रोल मैकेनिज्म और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की भी समीक्षा की गई। ड्रिल के परिणामों के आधार पर भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए आवश्यक सुझावों पर भी काम किया जाएगा।