​भास्कर न्यूज | बाड़मेर जिले में स्वास्थ्य सेवाएं खुद वेंटिलेटर पर आ गई हैं। एक तरफ जहां ग्रामीण इलाकों के पीएचसी पर डॉक्टरों की जगह लैब क्लीनर और सीएचओ मरीजों के भगवान बनकर इलाज की रस्म अदायगी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आपातकालीन सेवा का दम भरने वाली 108 एंबुलेंस की लापरवाही भी अब चरम पर पहुंच चुकी है। मामला बाड़मेर जिला अस्पताल के ठीक बाहर विवेकानंद सर्किल का है, जहां डीजल खत्म होने के कारण बीच सड़क पर एंबुलेंस बंद हो गई। नतीजतन, हाथ में गंभीर चोट के कारण तड़प रहे एक मरीज को एंबुलेंस से उतार दिया गया और उसे परिजनों के सहारे पैदल ही दौड़ते हुए इमरजेंसी वार्ड तक पहुंचना पड़ा। जिले में कुल 25 एंबुलेंस गाड़ियां संचालित हो रही हैं। इनमें 3 एडवांस लाइफ सपोर्ट गाड़ियां बाड़मेर, भाडखा और गुड़ामालानी में तैनात हैं। वहीं 21 बेसिक लाइफ सपोर्ट गाड़ियां सदर थाना, चौहटन, रतासर, बिजराड़, शिव, बिशाला, चवा, रामसर, गडरा रोड, गागरिया, सनावड़ा, धोरीमन्ना, रामजी का गोल, गुड़ामालानी, धनाऊ, सेड़वा, साता, गंगासरा, नोखड़ा, निम्बलकोट और भूणिया में सेवाएं दे रही हैं। इसके अलावा गुड़ामालानी में एक बाइक एंबुलेंस भी है। लेकिन धरातल पर मॉनिटरिंग और मेंटेनेंस शून्य होने की वजह से ये गाड़ियां अब लाइफ सपोर्ट के बजाय खुद डेथ ट्रैप साबित हो रही हैं। गागरिया में पत्थर कटिंग का काम करते समय रोशन खान पुत्र बांधा खान का बायां हाथ कटर की चपेट में आने से गंभीर रूप से जख्मी हो गया था। उसे तुरंत गागरिया सीएचसी पहुंचाया, जहां जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। मरीज को लेकर बाड़मेर के लिए रवाना हुए, लेकिन अस्पताल के मुख्य द्वार से कुछ ही दूरी पर विवेकानंद सर्किल के पास पहुंचते ही गाड़ी बंद हो गई। ^नियम के मुताबिक गाड़ी में आधा डीजल होते ही कंट्रोल रूम की सूचना पर नजदीकी पेट्रोल पंप से रीफ्यूलिंग करवा दी जाती है। गागरिया से बाड़मेर के बीच टाई-अप वाला पेट्रोल पंप बंद था। -सुरेंद्रपाल अणखिया, एरिया मैनेजर 108 एंबुलेंस का बीच रास्ते में बंद होना लापरवाही है। संचालक कंपनी को तुरंत नोटिस जारी कर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। मरीजों की जान से खिलवाड़ नहीं दिया जाएगा। - डॉ. विष्णुराम विश्नोई, सीएमएचओ, बाड़मेर मॉनिटरिंग के अभाव में जिले की 25 गाड़ियों के यही हाल