पश्चिमी राजस्थान में भीषण गर्मी और नहरबंदी के दोहरे संकट के बीच केंद्र सरकार का 1275 करोड़ रुपये का महत्वाकांक्षी रिज़र्वायर प्रोजेक्ट छह साल बाद भी अधूरा है। जिस योजना को नहरबंदी के दौरान जनता के लिए ‘लाइफलाइन’ बनना था, वह प्रशासनिक कछुआ चाल के कारण धरातल पर नहीं उतर सकी। विडंबना यह है कि जब साठ दिनों की लंबी नहरबंदी समाप्त होने को है, तब तक भी ये जलाशय तैयार नहीं हो पाए हैं। हर साल अप्रैल-मई में नहर की मरम्मत के लिए जलापूर्ति रोकी जाती है, जिसे नहरबंदी कहते हैं। इस दौरान बीकानेर और जोधपुर जैसे महानगरों में दो दिन में एक बार पानी की सप्लाई होती है। इस मजबूरी का फायदा उठाकर टैंकर माफिया एक चक्कर के 800 से 1500 रुपये तक वसूलते हैं। इसी संकट को जड़ से खत्म करने के लिए केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय ने सितंबर 2021 में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी, ताकि वर्ष 2054 तक की संभावित आबादी को 30 दिनों का वाटर बैकअप मिल सके। प्रोजेक्ट के तहत चार बड़े रिज़र्वायर बनने थे, लेकिन अब तक केवल आरडी 507 का काम पूरा हुआ है। इसमें पानी तो भरा गया है, लेकिन आधा होने के कारण यह फिलहाल केवल सिंचाई के काम आएगा। पीने का पानी मुहैया कराने के लिए अभी आवश्यक सिस्टम विकसित नहीं किया गया है। हाल ही में मुख्य अभियंता विवेक गोयल और अतिरिक्त मुख्य अभियंता सुनील कटारिया ने आरडी 750 का निरीक्षण कर काम की सुस्त रफ्तार पर कड़ी नाराजगी जताई है। ये जलाशय पश्चिमी राजस्थान के लिए बीमा पॉलिसी की तरह हैं। इनमें 1100 क्यूसेक पानी स्टोर करने की विशाल क्षमता है। रिसाव रोकने के लिए इनमें जिओ-मेंब्रेन और कंक्रीट की विशेष ‘’एडवांस्ड लाइनिंग’’ की गई है। साथ ही, यह एक नेटवर्क ग्रिड से जुड़े हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर पानी को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में डायवर्ट किया जा सके। 1275 करोड़ के इस बजट में जलाशयों के साथ नहर की जर्जर दीवारों का नवीनीकरण भी शामिल है, ताकि पानी की हर बूंद को सुरक्षित किया जा सके। अब टैंकरों से मिलेगी आजादी छत्तरगढ़ (बीकानेर) के किसान हेतराम बताते हैं, “नहरबंदी में हमारी फसलें तो जलती ही थीं पीने के पानी के लिए औरतों को कोसों दूर जाना पड़ता था। अगर 507 वाला रिजर्ववायर चालू होता है तो हमें बड़ी राहत मिलेगी। जैसलमेर के ग्रामीण बताते हैं कि 1121 आरडी पर काम पूरा होने से उन्हें उम्मीद है कि अगले साल से जून की गर्मी में कंठ नहीं सूखेंगे। प्रोजेक्ट की फाइलें बताती हैं कि शुरुआत में टेंडर प्रक्रिया 2022-23 में हुई थी। अब जुलाई 2026 की नई डेडलाइन तय की गई है। आरडी 507 बीकानेर- पहली कामयाबी बीकानेर के लिए अच्छी खबर ये है कि आरडी 507 पर जलाशय का निर्माण पूरी तरह संपन्न हो चुका है। यहाँ ट्रायल भी हो चुका। पानी भी भरा चुका है। मगर पूरा लबालब होना बाकी है। संभव है इस साल मानसून में ये पूरा भरा जा सके।