परिवारों के स्वास्थ्य बीमा को लेकर ताजा रिपोर्ट में प्रदेश के लिए राहत भरी खबर आई है। राजस्थान ने 28 में से 25 राज्यों को पीछे छोड़ते हुए फैमिली हेल्थ कवरेज में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश के कुल 1.83 करोड़ परिवारों में से 1.62 करोड़ परिवार स्वास्थ्य बीमा से जुड़ चुके हैं। अशोक गहलोत सरकार के समय तक प्रदेश के 1.38 करोड़ परिवार स्वास्थ्य बीमा से जुड़े थे। ढाई साल में बीमित परिवार करीब 24 लाख बढ़ चुके हैं। केंद्र सरकार की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, आंध्रप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बाद राजस्थान में सर्वाधिक परिवार स्वास्थ्य बीमा में कवर किए गए हैं। राजस्थान में 88.7 प्रतिशत परिवार कवर हो चुके हैं। वहीं आंध्रप्रदेश में 91.9 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में 90.5 प्रतिशत परिवारों का हेल्थ इंश्योरेंस हो चुका है। केरल जो स्वास्थ्य सेवा और नर्सेज में सबसे अग्रणी माना जाता है, वहां हेल्थ इंश्योरेंस केवल 57.1 प्रतिशत परिवारों का ही है। देश में सबसे कम स्वास्थ्य बीमा मणिपुर में 17.6 प्रतिशत है। आरजीएचएस और मां योजना में बीमित व्यक्तियों के फ्री इलाज के बाद भुगतान को लेकर आए दिन सरकार और अस्पतालों के बीच खींचतान चल रही है। पेंशनधारकों को इलाज के बिलों को लेकर आंदोलित है। इस स्थिति में नई रिपोर्ट राहत देने वाली है। राष्ट्रीय औसत से डेढ़ गुना प्रदेश का स्वास्थ्य बीमा देश के औसत 60.2 प्रतिशत परिवार स्वास्थ्य बीमा से जुड़े हुए हैं। इस बीमा का मतलब है एक परिवार से कोई न कोई एक व्यक्ति का स्वास्थ्य बीमा हो चुका है। वहीं राजस्थान में इसका करीब डेढ़ गुना 88.7 प्रतिशत का हेल्थ कवरेज हो चुका है। यह इसलिए हुआ कि सरकार ने प्रदेश को हेल्थ के ऐसे मॉडल के स्टेट के रूप में खड़ा किया है, जिसमें विदेशी पर्यटक को भी इलाज के लिए बहुभाषिया उपलब्ध होंगे। अब प्रसूताओं की हर जांच रिपोर्ट होगी ऑनलाइन राजस्थान में प्रसूताओं की मौतों को बाद सरकार ने हाई रिस्क प्रेगनेंट महिलाओं की हर जांच और इलाज को डिजीटली ऑनलाइन करने का फैसला किया है। अब किसी भी प्रसूता का इलाज शुरू होगा, तो उनके लिए एक आभा कार्ड बनाना जरूरी होगा। इससे उनकी मेडिकल हिस्ट्री ऑनलाइन रहेगी। हालांकि पहले से 7.1 करोड़ लोगों के आभा खाते पहले से बने हुए हैं।